‘हेलो बस्‍तर’ को पढ़ने की कोई आवश्‍यकता नहीं

Posted On by & filed under आलोचना, पुस्तक समीक्षा

कौशलेन्‍द्र “हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] ‘हैलो बस्‍तर’ की एकांगी समीक्षा की है राजीव रंजन प्रसाद ने  सत्‍य का गला घोट दिया है राहुल पंडिता ने १- भूमकाल से माओवादी संघर्ष की तुलना नहीं की जा सकती. दोनों में ज़मीन-आसमान का फर्क है. दोनों के उद्देश्यों में फर्क है. दोनों के… Read more »

[पुस्‍तक समीक्षा:’हेलो बस्तर’] आदिवासियों का सवाल तो रह गया

Posted On by & filed under पुस्तक समीक्षा, साहित्‍य

सुदीप ठाकुर  बस्‍तर और माओवादी आंदोलन पर केन्द्रित राहुल पंडिता की पुस्तक ‘हेलो बस्तर’ की समीक्षा लिखकर राजीव रंजन प्रसाद ने  इसे हकीकत से दूर बताया। इस विमर्श को आगे बढ़ाने को लेकर हम यहां 24 जुलाई 2011 को अमर उजाला में प्रकाशित सुदीप ठाकुर द्वारा लिखित इस पुस्‍तक की समीक्षा प्रकाशित कर रहे हैं। (सं.)   पिछली… Read more »

सत्‍य का गला घोट दिया है राहुल पंडिता ने

Posted On by & filed under आलोचना, पुस्तक समीक्षा

हाल ही में बस्‍तर के आदिवासियों की समस्‍याओं और यहां चल रहे माओवादी आंदोलन पर राहुल पंडिता की पुस्‍तक ‘हेलो बस्‍तर’ प्रकाशित हुई है। राजीव रंजन प्रसाद ने इसकी समीक्षा लिखी और यह सर्वप्रथम प्रवक्‍ता डॉट कॉम पर प्रकाशित हुई। इस समीक्षा पर 10 टिप्‍पणियां आईं। सारगर्भित। एक टिप्‍पणीकार को छोड़कर शेष सभी ने राजीव… Read more »

“हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] – राजीव रंजन प्रसाद

Posted On by & filed under पुस्तक समीक्षा, राजनीति

माओवादियों ने बस्‍तर को आग के हवाले कर दिया है, जिसकी तपिश में भोले-भाले आदिवासी झुलस रहे हैं। माओवादी भले ही इन क्षेत्रों के विकास की बात करते हों लेकिन उनके पास विकास का वैकल्पिक मॉडल नहीं है, उलटे वे शिक्षण संस्‍थानों और सड़कों को बम से उड़ाकर बस्‍तर के विकास मार्ग को अवरूद्ध करते… Read more »