‘‘खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे’’

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यह भी उल्लेखनीय है कि उस समय तेज प्रताप की उम्र साढ़े तीन बरस की थी, और यह जमीन रमा देवी से तेज प्रताप के नाम सेवा करने के लिए लिखाई गई। भला समझा जा सकता है। इसी तरह से श्रीमती कान्ति सिंह से केन्द्रीय मंत्री बनाने के एवज में 5 करोड़ रुपये का फ्लैट लिखा लिया गया। सूत्रों का कहना है कि मंत्री, सांसद, विधायक एवं दूसरे पद देने की एवज में लालू यादव बतौर रिश्वत जमीने लेते थे। खबर है कि बिहार के मुख्यमंत्री पद पर लालू और राबड़ी देवी के रहते और लालू के रेलमंत्री रहने के दौरान इस परिवार ने दसों हजार करोड़ रुपये की सम्पत्ति इकठ्ठा की। जहां तक लालू की ईमानदारी का प्रश्न है तो यह सर्वविदित है कि वह बिहार में अपने मुख्यमंत्रित्व काल मं 900 करोड़ के चारा घोटाले में दोषसिद्ध हैं, और कई महीनों तक जेल में रहने के दौरान फिलहाल जमानत पर हैं।