व्यंग्य बाण : होली और तीसरा मोर्चा

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पुराने गिले-शिकवे भुलाने और नवीन मेल-मिलाप करने के लिए होली से अच्छा कोई पर्व नहीं है। इसलिए भा.ज.पा. को रोकने और कांग्रेस को ठोकने के लिए चुनावी माहौल में हर दिन रिश्ते बन और बिगड़ रहे हैं। ज्वार-भाटे की तरह इसकी लहरें भी बार-बार आती हैं और किनारे की गंदगी लेकर चली जाती हैं। लेकिन… Read more »