बाबा साहेब और भीम सेना

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आज के परिप्रेक्ष्य में संदर्भ को समझने की आवश्यकता है। यदि अंग्रेज अपने कुशासन और गुण्डागर्दी के विरूद्घ और हमारे स्वतंत्रता प्रेमी पूर्वजों के विद्रोह को ‘राज्य के विरूद्घ अपराध’ मान सकते थे और उन्हें फांसी पर लटका सकते थे तो आज जब भारत एक संवैधानिक व्यवस्था से जन्मी शासन प्रणाली से आगे बढ़ रहा है तो उस संवैधानिक व्यवस्था के विरूद्घ हथियार उठाने वाले राष्ट्रद्रोही क्यों नहीं हो सकते? निश्चित ही राष्ट्रद्रोही हैं,