सुशासनी रिपोर्ट-कार्ड और बिहार की मीडिया

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-आलोक कुमार-    हाल में  बिहार के सारे अखबारों ने “आठ सालों के सुशासनी रिपोर्ट-कार्ड” को जिस तरीके से परोसा वो अपने आप ही सुशासन के मीडिया-मैनेजमेंट की सच्चाई को बयां करता है। पढ़ने के बाद यही लगा है कि मीडिया अपनी आलोचक और प्रहरी की भूमिका को पूर्णरूप से भूलकर “दरबारी” की भूमिका बखूबी निभा रहा है। मीडिया को “चाटुकारिता” की… Read more »