जैविक विविधता का सिमटता दायरा

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-देवेन्द्र कुमार- दशकों तक दक्षिण बिहार के किसानों को कथित आधुनिक खेती की तकनीक अपनाये जाने की प्रेरणा दी जाती रही, परंपरागत तकनीक और बीजों को पिछड़़ा और अलाभकर बतलाते हुए छोड़ने की सलाह दी जाती रही। पईन, पोखर, आहर, नाला की परंपरागत व्यवस्था के बदले डीजल इंजन, पम्प सेट लगवाने पर जोर दिया जाता… Read more »