अच्छे लोगों की अच्छाई

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-प्रभुदयाल श्रीवास्तव- अच्छे लोगॊं की अच्छाई चिड़ियों के गीतों को सुनकर, पत्ते लगे नांचने राई| कांव-कांव कौवे की सुनकर, पेड़ों ने कब्बाली गाई| राग बेसुरे सुनकर कोयल, गुस्से के मारे चिल्लाई| फिर भी उसके मधुर कंठ से, कुहू कुहू स्वर लहरी आ ई| अच्छे लोगों में रहती है, बात बात में ही अच्छाई| कभी नहीं… Read more »