अमित शाह के लिए 11 सूत्र

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उन्होंने भाजपा कार्यकर्त्ताओं से कहा है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्त्ताओं की तरह पूर्णकालिक बनें। उनके इस प्रस्ताव की स्वीकृति में लगभग 4 लाख कार्यकर्त्ताओं ने हाथ उठाए। कुछ ने एक साल, कुछ दस माह और कुछ ने 15 दिन पूर्णकालिक बनने का संकल्प किया। यह अमित शाह की अदभुत पहल है।

भाजपाः वैचारिक हीनग्रंथि से मुक्ति का समय

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लंबे समय के बाद भाजपा में अपनी वैचारिक लाइन को लेकर गर्व का बोध दिख रहा है। असरे बाद वे भारतीय राजनीति के सेकुलर संक्रमण से मुक्त होकर अपनी वैचारिक भूमि पर गरिमा के साथ खड़े दिख रहे हैं। समझौतों और आत्मसमर्पण की मुद्राओं के बजाए उनमें अपनी वैचारिक भूमि के प्रति हीनताग्रंथि के भाव कम हुए हैं। अब वे अन्य दलों की नकल के बजाए एक वैचारिक लाइन लेते हुए दिख रहे हैं। दिखावटी सेकुलरिज्म के बजाए वास्तविक राष्ट्रीयता के उनमें दर्शन हो रहे हैं। मोदी जब एक सौ पचीस करोड़ हिंदुस्तानियों की बात करते हैं तो बात अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक से ऊपर चली जाती है। यहां देश सम्मानित होता है, एक नई राजनीति का प्रारंभ दिखता है। एक भगवाधारी सन्यासी जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठता है तो वह एक नया संदेश देता है। वह संदेश त्याग का है, परिवारवाद के विरोध का है, तुष्टिकरण के विरोध का है, सबको न्याय का है।

सुशासन के कीर्तिमान गढ़ने का समय

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अब समय आ गया है जब भाजपा को प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के लिए विशिष्ट आचार संहिता का प्रावधान करना चाहिए , जिसमें नैतिकता , सदाचार , इमानदारी, संवेदनशीलता और सहृदयता जैसे उच्च मानक हो जिनके पालन को सुनिश्चित कराया जाए । क्योंकि भले ही जनता ने मोदी जी और पार्टी की विचारधारा पर विश्वास करके भाजपा को वोट दिया हो परंतु रोजमर्रा की समस्याओं के लिए कार्यकर्ताओं जनता का साबका पार्षद , विधायको और सांसदों से ही पड़ता है ।अगर इन लोगों का आचरण विपरीत किस्म का होगा तो जनता का विश्वास टूटेगा और उसे दूसरे विकल्प की तरफ देखना पड़ेगा ।

मणिपुर में भाजपा का ज़बरदस्त बढ़ता प्रभाव

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मणिपुर विधानसभा चुनाव के नतीजों में अलग कुछ लोग कांग्रेस की जीत का जश्न मना रहे हैं तो इस रिपोर्ट को भी समझिए। मणिपुर में भाजपा के मत प्रतिशत में करीब 20 गुना की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि पिछले चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस के मत… Read more »

जीत के साथ कुछ चुनौतियों की आहट को समझिए। – अनुश्री मुखर्जी

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आप सभी देशवासियों को केसरिया होली और देश के सबसे बड़े प्रदेश में सत्य की जीत पर बधाई व सहृदय शुभकामनाएं। लेकिन मैं जश्न के खुशनुमा माहौल के बीच ये भी कहना चाहूंगी कि ये अंजाम नहीं है, ये बस आगाज़ है, क्योंकि उत्तर प्रदेश को जहां आज तक उत्तम प्रदेश होना चाहिए था, वहां… Read more »

पढ़िए – होली के राजनीतिक रंग, प्रवक्ता डॉट कॉम के संग

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बीते 11 मार्च को चुनाव परिणाम के साथ ही एक बार फिर राजनीति के ऐसे अजग-गजब रंग उभरने लगे जैसे वो सचमुच परिणाम से पहले एक अलग रंग की तरह चढ़ा और परिणाम के बाद उतर गया हो। होली के राजनीतिक रंग को और परवान चढ़ाने के लिए प्रवक्ता डॉट कॉम आपके सामने चुनावी रंग… Read more »

अटलजी व भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रवादी यात्रा

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जन्मदिवस 25 दिसम्बर के अवसर पर डा. राधेश्याम द्विवेदी 1925 ई. में कुछ राष्ट्रवादी महापुरूषों ने माननीय श्री केशव हेडगेवार के नेतृत्व में एक गैर राजनीतिक एवं सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संध की स्थापना नागपुर में किया था. गुलामी की जिन्दगी से निजात दिलाने के लिए एक राजनीतिक संगठन की आवश्यकता प्रतीत हुई तो श्री… Read more »

प्रदेश की राजनीति में गाली कांड से किसको लाभ ?

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मृत्युंजय दीक्षित आगामी विधानसभा चुनावो के मददेनजर अब उप्र की राजनीत गर्मा गयी है। विगत कई दिनों से  एक के बाद एक बगावत के झंझावत झेल रही बसपा अचानक से उभरकर सामने आ गयी हैं वह भी भाजपा के  पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह की अभद्र भाषा के प्रयोग के कारण। जब से संसद का… Read more »

वो दिन हवा हुए जब पसीना गुलाब था

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बसपा नेताओं की उपस्थिति में पार्टी कार्यकत्र्ताओं ने दयाशंकरसिंह की पत्नी, बेटी, माता व बहन के लिए अपशब्दों को बोलने की सारी सीमाएं ही लांघ दीं। इसके पश्चात कु. मायावती की किरकिरी आरंभ हो गयी है। वह जिस लाभ को लेने के लिए चली थीं-अब वह उन्हें मिलता हुआ दिखायी नही दे रहा है। दयाशंकर… Read more »

अब डिग्री क्यों नहीं पूछते

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भाषा के विषय में निर्मला जोशी जी के बेहद खूबसूरत शब्द ‘माता की ममता यही , निर्मल गंगा नीर इसका अर्चन कर गए तुलसी सूर कबीर ‘ आज भारत की राजनीति ने उस भाषा को जिस स्तर तक गिरा दिया है वह वाकई निंदनीय है। उत्तर प्रदेश बीजेपी के वाइस प्रेसीडेन्ट दयाशंकर सिंह ने 20… Read more »