एक नए भारत का सृजन 

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न्द्र सरकार द्वारा पुराने 500 और 1000 के नोटों का चलन बन्द करने एवं नए 2000 के नोटों के चलन से पूरे देश में थोड़ी बहुत अव्यवस्था का माहौल है। आखिर इतना बड़ा देश जो कि विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में दूसरे स्थान पर हो थोड़ी बहुत अव्यवस्था तो होगी ही।
राष्ट्र के नाम अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री ने यह विश्वास जताया था कि इस पूरी प्रक्रिया में देशवासियों को तकलीफ तो होगी लेकिन इस देश के आम आदमी को भ्रष्टाचार और कुछ दिनों की असुविधा में से चुनाव करना हो तो वे निश्चित ही असुविधा को चुनेंगे और वे सही थे।

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के नये संदर्भ

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लगभग सभी गैर कानूनी कार्यों में पैसों का लेनदेन बि‍ना कि‍सी तृतीय पक्ष (बैंक आदि‍ सरकारी यंत्रणा) के होता है, इससे गैर कानूनी धंदों में दि‍न दूगनी और रात चौगुणी प्रगती होती हैं। इन सभी गोरखधंदों को बंद करने का यह रामबाण उपाय हैं। इसमें भारतीय रि‍ज़र्व बैंक के अर्थशास्‍त्री और वि‍शेषज्ञों का योगदान है। नये नोटों को सैटेलाइट द्वारा ट्रैक करने की सुवि‍धा के कारण आगे आने वाले नोटों की ट्रैकिंग से नोटों का प्रयोग हो रहे स्‍थानों का पता लगाया जा सकेगा इससे भवि‍ष्‍य में नकली नोटों को बनाने में के खतरे को भी टाला जा सकेगा।

काली कमाई के खि़लाफ़ नमो का ऐतिहासिक फ़ैसला      

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काले धन का संग्रहण करने वाले अब इस अकूत धन को ठिकाने लगाने के नये-नये तरीके खोज रहे हैं। इस निर्णय से न जाने कितने ही करोड़पति,धनाढ्य और पूंजीपति कुछ ही पलों में कंगाल हो गए। भले ही फ़ैसले ने भारत के हर छोटे-बड़े उस तबके को भी प्रभावित किया जो कि पूरी तरह निर्दोश,शरीफ़ और ईमानदार था। मगर इसके महान मक़सद को देखते हुए यह हर लोकतन्त्र प्रेमी का फ़र्ज़ बनता है कि वो देश के लिए इन्हें हृदय से भुला दे।

नेता बाट दें अपना काला धन!

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डा. वेद प्रताप वैदिक ‘काले धन’ के सवाल पर जितने नेता लोग बौखलाए हैं, उतनी बौखलाहट उद्योगपतियों और व्यवसायियों में देखने में नहीं आ रही है। इसका अर्थ क्या है? इसका एक अर्थ यह भी हो सकता है कि काले धन के जितने बड़े नगद भंडार नेताओं के पास हैं, उतने उद्योगपतियों और व्यवसायियों के… Read more »

आखिर इस राष्ट्रहित के निर्णय पर आपत्ति क्यों?

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इन दोनों ही बातों में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना है, कोई भी समझदार और देशभक्त नागरिक इसका विरोध करेगा ऐसा समझ नहीं आता है। ऐसा पहली बार नहीं है जब राष्ट्रहित की खातिर कोई बड़ा निर्णय लिया गया है। यहां यह भी लिखने में कोई संकोच नहीं है कि इस देश के नागरिकों ने हमेशा राष्ट्रहित हेतु लिए कठोर निर्णयों का न केवल स्वागत किया है बल्कि उसमें तन मन धन से सहयोग भी किया है।

‘काला धन’: घबराइए मत

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जहां तक नगदप्रेमी करोड़पतियों, अरबपतियों, खरबपतियों और हमारे महान नेताओं का प्रश्न है, उन्हें भी ज्यादा डरने की जरुरत नहीं है। वे अपने हजारों कर्मचारियों और लाखों पार्टी-कार्यकर्ताओं में से एक-एक को लाखों पुराने नोट देकर उन्हें नये नोटों में बदलवा सकते हैं। उप्र के नेताओं ने यह ‘पवित्र कार्य’ शुरु भी कर दिया है। नेता ही नेता को पटकनी मार सकते हैं। जाहिर है कि सरकार डाल-डाल है तो सेठ और नेता पात-पात हैं।

काले धन के पेंच

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पीयूष द्विवेदी विगत दिनों योगेन्द्र यादव और प्रशान्त भूषण की एक प्रेस कांफ्रेंस में ऑनलाइन वार्ता के जरिये स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा स्थित एचएसबीसी बैंक के व्हिसल ब्लोवर हर्व फाल्सियानी द्वारा दावा किया गया कि भारत से अब भी बड़ी मात्रा में काला धन विदेश भेजा जा रहा है जबकि पहले से जमा काले धन को… Read more »

अफसरों की भ्रष्ट प्रवृत्ति रोकना जरुरी

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रमेश पाण्डेय देश और दुनिया में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाए जाने को लेकर कशमकश जारी है। सामाजिक संगठन से लेकर राजनैतिक संगठनों द्वारा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जा रहा है। समाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे आए दिन भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर आन्दोलन करते रहते हैं। योग गुरु बाबा रामदेव भी भ्रष्टाचार के मुद्दे… Read more »

काले धन से उपजी काली राजनीति

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डॉ. मुनीश रायजादा गत दिनों अरविंद केजरीवाल अमेरिका और दुबई की लघु यात्रा पर गए तो बीजेपी और कांग्रेस जैसे दलों को इस नवोदित पार्टी पर हमला करने का एक और मौका मिल गया। इन राजनीतिक दलों ने एक स्वयंभू अदालत के अंदाज में आम आदमी पार्टी को विदेशी अनुदान नियमन अधिनियम (एफ.सी.आर.ए.) और जनप्रतिनिधि… Read more »

चुनावी काले धन के जनकल्याण

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प्रमोद भार्गव अब चुनावी धन काला हो या सफेद अपने राम को क्या? धन पर थोड़े ही काला-सफेद लिखा होता है। उसकी महिमा तो राष्ट्रपिता की छपी तस्वीर से है। राष्ट्रपिता को तो अफ्रीका में काले होने के कारण ही गोरों का अपमान झेलना पड़ा। लेकिन वहां बात नस्ल की थी। नस्लीय सोच की थी।… Read more »