सिसके माँ का प्यार

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दर्ज़ हुई इतिहास में, फिर काली तारीख़। मानवता आहत हुई, सुन बच्चों की चीख़।।   कब्रगाह में भीड़ है, सिसके माँ का प्यार। सारी दुनिया कह रही, बार-बार धिक्कार।।   मंसूबे जाहिर हुए, करतूतें बेपर्द। कैसा ये जेहाद  है, बोलो दहशतगर्द।।   होता है क्यूँकर भला, बर्बर कत्लेआम। हिंसा औ’ आतंक पर, अब तो लगे… Read more »