‘बॉम्बे टू इंडिया’ में क्षेत्रीयता की बू

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डॉ. मनोज चतुर्वेदी क्षेत्रीयता, जातिवाद, भाषावाद और संकिर्ण राष्ट्रीयता एक ऐसे विषय हैं जो मानवता को कलंकित करते हैं। यह इसलिए संभव हो सका है कि समाजद्रोहियों को समाज ही सिर पर चढ़ा लेता है और वे समाज के नेता/मार्ग दर्शक बन जाते हैं। देश के भिन्न-भिन्न भागों में प्रांतवाद की जो लौ समय-समय पर… Read more »