भारत में न्यायिक सुधार की संभावनाएं और चुनौतियाँ

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मनीराम शर्मा हमारे न्यायालयों और वकीलों के मध्य बहुत सी बातें अस्वस्थ परंपरा के रूप में प्रचलित हैं। किन्तु इन सबका एक ही मूल कारण है, वह यह है कि न्यायिक निकाय स्वविनियमित है। स्वविनियमन वास्तव में कार्य नहीं करता है। इसका समाधान वकीलों एवं न्यायाधीशों का मात्र बाहरी विनियमन है। प्रत्येक अन्य पेशे, जैसे… Read more »