असंयम से बदलाव नहीं, बवाल होगा

Posted On by & filed under महिला-जगत

चैतन्य प्रकाश पिछली पूरी सदी मनुष्य जाति के इतिहास में ‘वस्त्र सभ्यता’ की तरह बीती है। वस्त्रें से शरीर ढंकने, कम ढंकने, उघाड़ने या ओढ़ने पर बड़ा जोर रहा है। बट्रर्ड रसल ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, ”विक्टोरियन युग में स्त्री के पैर का अंगूठा भी दिखता था तो बिजली दौड़ जाती थी, अब… Read more »