पहली सदी से है भारत में ईसाइयत

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आर. एल. फ्रांसिस ईसाइयत का आगमन ईसा मसीह के शिष्य संत थॉमस द्वारा अरब की खाड़ी पार कर भारत में आने के साथ ही शुरु हो गया था। केरल और तमिलनाडु के कई परिवारों द्वारा ईसाइयत को अपनाने के बावजूद यह सुदूर दक्षिण के अलावा आगे नहीं बढ़ पाई। 14वीं सदी में पुर्तगाली नाविक वास्कोडिगामा… Read more »

ईसाई धर्म और नारी मुक्ति / प्रो. कुसुमलता केडिया

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प्रो. कुसुमलता केडिया क्रिश्चिएनिटी की जिन मान्यताओं के विरोध में यूरोपीय नारी मुक्ति आंदोलन वीरतापूर्वक खड़ा हुआ, वे मान्यताएं हिन्दू धर्म, बौध्द धर्म तथा विश्व के सभी धर्मों में कभी थी ही नहीं। यहां तक कि यहूदी धर्म और इस्लाम में भी ये मान्यताएं कभी भी नहीं थीं। भले ही स्त्रियों पर अनेक प्रतिबंध इस्लाम… Read more »

ईसाई समाज की बदलती सोच

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आर एल फ्रांसिस पिछले एक दशक से ईसाई मिशनरियों और हिन्दू संगठनों के बीच धर्मांतरण को लेकर चली आ रही कड़वाहट का सबसे ज्यादा नुकसान ईसाई समुदाय को उठाना पड़ा है। चर्च नेतृत्व ने इन्हें अपने रक्षा कवच की तरह इस्तेमाल करते हुए तमाम मुश्किलों के बीच में भी अपने विस्तार की रफतार को ढीला… Read more »

ईसाइयत का लबादा और सत्य शोधक समाज

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नन्दलाल शर्मा धर्म भी कमाल की चीज़ है। हर कोई इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करता है। चाहे वो पिछड़ा वर्ग की राजनीति करने को हों या ब्राह्मणवाद और मनुवाद के खिलाफ लोगों को खड़ा करना हों। इसके लिए लोग झूठी कहानियाँ गढ़ते है, तो लम्बे चौड़े वादे भी करते हैं। बस यही कहानी… Read more »

विरोध के बहाने मिशनरी को अपनी जमीन बचाने की चिंता

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आर.एल.फ्रांसिस जैसे-जैसे नर्मदा कुंभ का दिन नजदीक आता जा रहा है वैसे ही ईसाई मिशनरी इसके विरोध में खुल कर सामने आने लगे है। उन्हें डर सताने लगा है कि इस कुंभ में शामिल होने वाले गैर ईसाई आदिवासियों और ईसाई आदिवासियों के बीच तनाव फैल सकता है और इसके साथ ही घबराहट में ईसाई… Read more »

भारत में चर्च का मतांतरण अभियान और विदेशी शक्तियाँ

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2008 में जन्माष्टमी के दिन स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती की ओडीसा के कंधमाल जिला में चर्च ने माओवादियों की सहायता से हत्या कर दी थी। स्वामी जी ओडीसा के जनजाति समाज को चर्च द्वारा मतांतरिता किये जाने के प्रयासों का विरोध कर रहे थे। भारत को, विषेशकर भारत के जनजाति सामज को ईसाई मजहब में मतांतरित… Read more »