गंवई गंवार की प्रतीति आत्मगंध की अनुभूति

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– हृदयनारायण दीक्षित गांव की अपनी सुरभि है, अपनी गंध है। गंवई-गंवार की अपनी प्रतीति है और आत्मगंध की अपनी अनुभूति है। गांवों से बाहर जाती और सांझ समय खेतों से लौटती गायों की पदचाप से उठी धूलि गंध देवों को भी प्रिय है। गांव में गेंदा है, चमेली है, रातरानी है, गुलाब हैं तथा… Read more »