जब कला बन जाए कारोबार!

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-तारकेश कुमार ओझा-   किसी जमाने में जब कला का आज की तरह बाजारीकरण नहीं हो पाया था, तब किसी कलाकार या गायक से अपनी कला के अनायास  और सहज प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। शायद यही वजह है कि उस दौर में किसी गायक से गाने की फरमाइश करने पर अक्सर… Read more »

“द्विअर्थी संवादों से भरे हुए हैं कॉमेडी शो”

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लोग अपने व्यस्त जीवन से कुछ पल चुरा कर हंसना – हँसाना चाहते हैं और इसके लिए वो टी वी पर प्रसारित होने वाले कॉमेडी शो को देखते हैं लेकिन क्या सही मायनों में आज के हास्य शो को देख कर दर्शक हँसते हैं या उन्हें द्विअर्थी संवादों को झेलना पड़ता है. पूरा परिवार एक… Read more »