भारत की शोचनीय स्थिति और बहुसंख्यक समाज की महिलाएं

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-आनंद जी. शर्मा-  निष्णात वैद्य किसी कष्टसाध्य रोग से ग्रस्त रोगी का मुखमंडल देख कर औषधि नहीं दे देता, अपितु रोग के कारण का अनुसंधान करने के लिये उसकी जड़ तक जाकर कारण सुनिश्चित करने के पश्चात ही उचित औषधि एवं पथ्य पालन का कठोरता से आदेश देता, क्योंकि एक वैद्य का कर्तव्य रोगी को… Read more »