औरों पर न थोपें अपनी कार्यशैली दूसरों की मौलिकता को भी दें आदर

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– डॉ. दीपक आचार्य जब से आत्म मूल्यांकन, चिंतन और विश्लेषण की प्रवृत्तियाँ समाप्त हो चली हैं, हमारे यहाँ हर क्षेत्र में स्वयं को महानतम बुद्धिमान और योग्यतम समझने का शौक दूर-दूर तक अपने पाँव पसार चुका है। कहीं भी आदमी की योग्यता की कोई कसौटी नहीं रही। व्यक्तित्व की ऊँचाइयों को दर्शाने वाले मानदण्ड… Read more »