हिंदुओं ने बांग्लादेश को मुक्ति दिलाई, फिर हिंदु होना वहां जुर्म क्यों है?

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आंकड़े चीख चीख कर बताते हैं कि कैसे वहां हिंदुओं की संख्या लगातार घट रही हैं.कैसे वहां भय का माहोल है.सोशल मीडिया पर वहां हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर लिखने वाले हिंदुओं की तो तुरंत हत्या पाकिस्तान के ईश निंदा कानून की तरह कर दिया जाता है.हां बावजूद इसके कुछ मुस्लिम पत्रकार हैं जो बांग्लादेश में लगातार हो रहे हिंसा पर कुछ तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी करते हैं. 20 अप्रैल 2017 को ढाका ट्रीब्यून में सईरत सलकेन’ ‘हमारे हाथों में खून’ शीर्षक लिखते है….मैं जुमे का नमाज पढने के बाद अपनी चटाई समेट रहा था तो देखा सामने वाले एक निर्माणाधीन मकान में कुछ लोग हल्ला करते हुए हाथों मे लोहे का सरिया लेकर घुस रहे थे. मैं भी पीछे पीछे गया तो देखा कुछ मजदूर थे जो वहां काम कर रहे थे कुछ सो रहे थे. हाथों में सरिया लिए लोग मजदूरों की पिटाई करने लगे यह कहते हुए की इबादत के समय सो रहे हो? मजदूरों ने जवाब दिया लेकिन हम तो हिंदु हैं ! पिटाई करने वालो ने उन्हें पिटते और गाली देते हुए कहा तो अपनी पूजा क्यों नही करते? सईकत आगे लिखते हैं हिंदुओं पर लगातार अत्याचार हो रहा है सरकार मौन है,स्वतंत्र विचारवालों की लगातार हत्या हो रही है.