कल्याण के नाम पर कण्डोम

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-डॉ राजेश कपूर पश्चिमी प्रभाव में हमने सीखना शुरू कर दिया है कि कण्डोम साथ लेकर चलो ताकि एड्स से बचाव हो। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे अश्लील विज्ञापन देखने को मिल जाते हैं कि कण्डोम साथ लेकर चलो। क्या मायने हैं इसके? भारतीयों की ऐसी पतित सोच तो कभी नहीं रही, पर हमें ऐसा बनाने… Read more »

कला के जरिए कंडोम के प्रयोग पर जोर

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हमारे समाज में सेक्स को वर्जित माना जाता है और शारारिक जरुरतों की अवहेलना की जाती है। दरअसल जीवन को संपूर्णता में जीने की कोशिश कोई नहीं करना चाहता। यौन कार्यकलापों को अश्‍लीलता की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मूल कारण है हमारी सभ्यता और संस्कृति, जो हमें उन्मुक्त एवं स्वछंद होने से रोकती… Read more »

कंडोम के उचित उपयोग ढ़ूँढने की जरूरत

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आज से सात साल पहले वाराणसी के एक पत्रकार श्री राजीव दीक्षित के एक खोजपूर्ण रिर्पोट को लेकर जमकर बावेला मचा। उक्त रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया था कि परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने के गरज से मुफ्त में बाटाँ जानेवाला कंडोम दम्पतियों के बेडरूम में जाने के बजाय साड़ी बुनकरों… Read more »