हम भ्रष्टन के, भ्रष्ट हमारे !!!

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हमारी लालचें क्या हमें संवेदना से मुक्त कर चुकी हैं ? -संजय द्विवेदी देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी जो महात्मा गांधी से भी अपनी रिश्ता जोड़ते हुए नहीं थकती है, की अखिलभारतीय बैठक की सबसे बड़ी चिंता वह भ्रष्टाचार नहीं है जिससे केंद्र सरकार की छवि मलिन हो रही है। दुनिया के भ्रष्टतम… Read more »

आपराधिक एवं भ्रष्ट तत्वों से ग्रसित संसदीय पवित्रता की रक्षा कौन करेगा?

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दिल्ली से प्रकाशित एक दैनिक हिन्दी समाचार-पत्र लिखता है कि “पिछले सालों में बनी न्यायपालिका और विधायिका में टकराव जैसी स्थिति के बीच भारतीय लोकतंत्र के लिए यह खबर सुकून देने वाली कही जा सकती है। जिसमें सर्वोध न्यायालय की संविधान पीठ ने अपने एक अहम फैसले में साफ कर दिया कि संसद की कार्यवाही… Read more »