धार्मिक संपत्तियों के यह लुटेरे…

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तनवीर जाफ़री हमारे देश में ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ जैसी प्राचीन कहावत का अस्तित्व में आना तथा आज भी इसका प्रचलित व लोकप्रिय होना अपने-आप में इस बात का सुबूत है कि हमारा समाज प्राय: शताब्दियों से दोहरे चरित्र के साथ जीता आ रहा है। यानी दूसरों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाना और खुद भ्रष्ट… Read more »