देश किधर जा रहा है?

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-आरके गुप्ता- देश में चारों ओर चुनावी वातावरण है ऐसे में प्रत्येक राजनैतिक दल वोट पाने के लिये जनता से लोकलुभावने वादे कर रहा है। परन्तु एक विशेष सम्प्रदाय (मुस्लिम) के वोट पाने के लिये तो कुछ दल संविधान की भावनाओं का भी उल्लंघन कर रहे हैं। मुस्लिम समाज अपनी एकजुट वोटों का दबाव बनाकर… Read more »

नौटंकी बंद करो दिग्गी राजा

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दिग्गी राजा उर्फ दिग्विजय सिंग बडे अफसोस के साथ आपके नाम के साथ का सम्मनसूचक शब्द जी को हटाना पड रहा है । जरा सोचकर देखो कि आप किस पद पर बैठ कर क्या क्या कह रहे हो । लगता है कांग्रेस महासचिव का पद देकर गांधी परिवार ने आपको खरीद लिया है । अपने पदमोह… Read more »

प्रणाली नहीं बदली तो खंडित होगा देश

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सूर्यकांत बाली आज जो खंडित जनादेश आ रहे हैं, उसका कारण स्पष्ट है। आज हमारा समाज इतना अधिक खंडित हो चुका है कि वह एक देश और एक समाज के रूप में सोच नहीं पाता। समाज का हर छोटा खंड अपने स्वार्थ में इतना अधिक तल्लीन रहता है कि वह अपने लिए वोट देता है,… Read more »

देश पर कलंक हैं मनरेगा के यह लुटेरे

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-निर्मल रानी केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने अपने पिछले शासनकाल में देश में बेराज़गारी कम करने के उद्देश्य से जो सबसे प्रमुख योजना लागू की थी उसका नाम था राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी योजना अर्थात् नरेगा। बाद में इसी योजना को महात्मा गांधी के नाम पर समर्पित कर इसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोज़गार योजना… Read more »

तमाशबीनों के देश में लुटेरे

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-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी आज भारत तमाशबीनों का देश है। इसमें नागरिक नहीं तमाशबीन निवास करते हैं। तमाशबीनों की तरह आज हम सब एक-दूसरे को देख रहे हैं। पूरे समाज को देख रहे हैं। माओवादियों ने दंतेवाडा में बम के धमाके किए,निर्दोष लोग मारे गए, हम तमाशा देखते रहे। हाल ही में अहमदाबाद में दंगे हुए हम… Read more »

कुपोषण के शिकार देश के नौनिहाल

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यह हैरत की बात है कि जिस देश के खाद्यान भंडारों में पड़ा अनाज सड़ रहा हो उस देश के नौनिहाल कुपोषण का शिकार होकर अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं. यूनिसेफ द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पांच वर्ष से कम उम्र के ऐसे बच्चों की तादाद दुनिया में सबसे… Read more »

देशी विदेशी कंपनियों के इशारों पर सरकार !

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सरकारी फैसलों को अपने हित में प्रभावित करने के लिए कॉरपोरेटी दबाव बनाने की बात कोई नई नहीं है। पूरी दुनिया में लंबे समय से चलता आ रहा है। इसके लिए कंपनियों और उद्योगपतियों द्वारा संपर्क साधने उपहार देने जैसे तरीके अपनाए जाते रहे हैं। लेकिन आज स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि अब… Read more »

देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें

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यूं तो किसी भी गणतंत्र के लिए 60 साल कोई ज्यादा समय नहीं होता, उसकी सफलता और असफलता का लेखा-जोखा मात्र इतने समय में करना संभव नहीं है। लेकिन अगर अपने आस-पड़ोस के हालात देखें तो इस सफलता पर कम से कम संतुष्ट तो हुआ ही जा सकता है। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यही है… Read more »