स्वरचित दोहे

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मरा मरा का जाप कर, डाकू बना महान। राम राम मैँ नित जपूँ , कब होगा कल्यान। रक्षक ही भक्षक बने, खीँच रहे हैँ खाल। हे प्रभु! मेरे देश का, बाँका हो ना बाल। आरक्षण के दैत्य ने, प्रतिभा निगली हाय। देश रसातल जा रहा, अब तो दैव बचाय। बेरोजगारी बढ. रही, जनसंख्या के साथ।… Read more »