गाय बचेगी तो देश बचेगा

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-राकेश कुमार आर्य-    गो-दुग्ध को हमारे यहां प्राचीन काल से ही स्वास्थ्य सौंदर्य के दृष्टिकोण से अत्यंत लाभदायक माना गया है। हमारे देश में स्वतंत्रता के वर्षों पश्चात भी गो-दुग्ध, छाछ, लस्सी आदि हमारे राष्ट्रीय पेय रहे हैं। सुदूर देहात में आप आज भी जाएंगे तो लोग आपको चाय-कॉफी के स्थान पर दूध आदि… Read more »

गाय को नहीं, मुझे मार गोली

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सामाजिक व राष्ट्रीय जागरण के अग्रदूत सुविख्यात उपन्यासकार प्रेमचंद उन दिनों गोरखपुर के एक विद्यालय में शिक्षक थे। उन्होंने गाय रखी हुई थी। एक दिन गाय चरते-चरते दूर निकल गई। प्रेमचंद गाय की तलाश करने निकले। उन्होंने देखा कि गाय अंग्रेज कलेक्टर की कोठी की बगीची में खड़ी है तथा अंग्रेज कलेक्टर उसकी ओर बंदूक… Read more »

कहां जाती हैं पकड़ी गई गायें —- 3

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गाय और ग्लोबल वार्मिंग! लिमटी खरे दुनिया का चौधरी अमेरिका अब भारत की गौ माता पर अपनी कुदृष्टि डालने लगा है। अमेरिका को गाय फूटी आंख नहीं सुहा रही है इसका कारण है गाय के द्वारा किया जाने वाला ‘मीथेन‘ गैस का उत्सर्जन। मीथेन पर्यावरण के लिए अनुपयोगी होने के साथ ही साथ घातक मानी… Read more »

कहां जाती हैं पकड़ी गई गायें —- 2

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. . . इसलिए कत्लखाने जाने लगी गायें लिमटी खरे मीडिया में जब तब यह खबर सुर्खियों में रहा करती है कि फलां जगह से कत्लखाने ले जाई जा रही ट्रक भरकर गाय पकड़ी गईं। सवाल यह उठता है कि इक्कीसवीं सदी के आगाज के साथ ही सनातन पंथियों की अराध्य गौ माता को आखिर… Read more »

कहां जाती हैं पकड़ी गई गायें!

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लिमटी खरे गाय को भारत गणराज्य में माता का दर्जा दिया गया है। सनातन पंथी अनेक धर्मावलंबी लोग आज भी गाय की रोटी (गौ ग्रास) निकालकर ही भोजन ग्रहण करते हैं। गाय से दूध मिलता है जिसके अनेक उत्पाद हमारे जीवन में उपयोगी हैं, वहीं गाय का गोबर भी अनेक कामों में आ जाता है।… Read more »

भारतीय समाज और गाय

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सौरभ मालवीय मानवता ने जब भी चेतना को प्राप्त किया तो उसने सर्व शक्ति सम्पन्न को मातृ रूपेण ही देखा है। इसी कारण भारत में ऋषियों ने गऊ माता, गंगा माता, गीता माता, गायत्री माता और धरती माता को समान रूपेण्ा प्रथम पूज्यनीय घोषित किया है। इन पंचमातृकाओं में गाय ही सर्वश्रेष्ठ है और सबकी… Read more »

अनूठे गौ सेवक भाईजी

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आशीष कुमार ‘अंशु’ ‘कुल्लू के अंदर दूध ना देने वाली गाएं किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रहीं हैं, इसी प्रकार बिलासपुर, मंडी में बंदरों का आतंक हैं। हिन्दू समाज के लोग अपनी धार्मिक आस्था की वजह से इन्हें मारते नहीं हैं। जिसकी वजह से उन्हें नुक्सान भी उठाना पड़ता है।’ बागवानी अनुसंधान केन्द्र… Read more »

गीतालेख/ गौ माता, तेरा ये ”वैभव” (?) अमर रहे

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गिरीश पंकज गाय के सवाल पर मैं निरंतर कुछ न कुछ लिखता रहता हूँ. यह बता दूं कि मैं धार्मिक नहीं हूँ. पूजा-वगैरह में कोई यकीन नही करता. मंदिर भी नहीं जाता. भगवान् के सामने हाथ जोड़ने की ज़रुरत ही नहीं पडी, क्योंकि मेरा मानना है, कि ”जिसका मन निर्मल होता है/जीवन गंगाजल होता है”… Read more »

मात्र गोपाश्टमी के दिन दुलारने से नहीं बचेगी गौ माता!

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गोपाश्टमी 14 नवम्बर पर विषेश (कार्तिक शुक्ला अश्टमी को हिन्दु समाज परम्परा से गोपाश्टमी के रूप में मनाता रहा है किंतु वर्तमान समय में यह पर्व केवल रस्म अदायगी बनकर रह गया है। प्रस्तुत लेख में हम भारतीय गाय के सभी प्रकार के महत्व, लाभ, उसके संरक्षण आदि के बारें में चर्चा करेगें।) हिन्दू गाय… Read more »

गाय बची तो ही हिन्दू और मुसलमान बचेगा

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-हरपाल सिंह भारत की संस्कृति, समृद्वि और सभ्यता का आधार गंगा, गौ, गायत्री, गीता और गुरु ही रही है। भारत की संस्कृति प्रकृति मूलक संस्कृति है। दुनिया के प्राचीनतम ग्रन्थ वेदो में कण-कण के प्रति अहोभाव की अभिव्यक्ति है। हमने सूर्य-चन्द्र, ग्रह नक्षत्र, पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, पेड़-पौधों को पूज्य माना है। प्रकृति का कण-कण हमें देता… Read more »