लोक कला महोत्सव

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प्रमोद कुमार बर्णवाल लोक विधाओं के महत्व का अभिज्ञान इसलिए आवश्यक है क्योंकि लोक-साहित्य लोकजीवन का अभिलेखागार है। किन्तु यह विडम्बना ही कही जायगी कि लोक कलाओं और कलाकारों को कभी वैसी प्रतिष्ठा नहीं मिली जैसी शास्त्रीय कलाओं और कलाकारों को मिली। बाजारीकरण ने तो इसके अस्तित्व को ही संकट में डाल दिया। आज की… Read more »