कविता ; बिटिया – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

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इधर रोये बिटिया उधर रोये बिटिया पढ़ पढ़ के पा पा की प्यारी सी चिठिया| भईयों ने अपनी गृहस्थी सजा ली पापा से सबने ही दूरी बना ली अम्मा की तबियत हुई ढीली ढाली उन्हें अब डराती है हर रात काली सुबह शाम हाथों से खाना बनाना धोना है बरतन और झाड़ू लगाना जीने का… Read more »

चंबल के बीहड़ों में गूंजने दो बेटी की किलकारी

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लोकेन्‍द्र सिंह राजपूत मैं मध्यप्रदेश के ऐसे इलाके से ताल्लुकात रखता हूं, जो कई बातों के लिए सुविख्यात है और कुख्यात भी है। ग्वालियर का किला और यहां जन्मा ध्रुपद गायन ग्वालियर-चंबल संभाग को विश्वस्तरीय पहचान दिलाता है। वहीं मुरैना का ‘पीला सोना’ यानी सरसों से भी देशभर में इस बेल्ट की प्रसिद्धी है। बटेश्वर… Read more »