दामिनी कह गई- अब सोना नहीं

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लोकेन्द्र सिंह राजपूत दु:खद, बेहद दु:खद २०१३ का आखिरी शनिवार। दामिनी चली गई। हमेशा के लिए इस बेदर्द दिल्ली से। बेहया दुनिया से, जहां उसे सिर्फ मांस की तरह देखा गया। भेडिय़ों ने नोंचा था, १३ दिन पहले उसका जिस्म। १३ दिन बाद मौत हो गई भारत की अस्मिता की। घनघोर शर्मनाक दिन था १६… Read more »

समाज के किस प्रवेशद्वार से आते बलात्कारी

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आशीष वशिष्ठ   दिल्ली में मेडिकल छात्रा के साथ हुए गैंगरेप की घटना ने देश की अंर्तत्तामा को झकझोर कर रख दिया है. राजधानी दिल्ली से लेकर देश के कोने-कोने में इस घटना की गंूज सुनाई पड़ रही है. लचर और अपाहिज कानून, संवेदनहीन और हठधर्मी सरकार, भ्रष्टï और नकारा पुलिस प्रशासन से ऊबी हुई… Read more »

दिल्ली दुष्कर्म:कानून से अधिक व्यवस्था में दोष है

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राकेश कुमार आर्य दिल्ली में हुई एक बस में युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना ने दिल्ली को दहला दिया है। देश की राजधानी में आजाद भारत के इतिहास में पहली बार देश के युवाओं ने ऐसी हुंकार भरी है कि उसका कोई सानी नही है। कोई दूसरा उदाहरण नही है। बिना नेता के… Read more »

दिल्ली गैंगरेपः कानून नहीं व्यवस्था बदलने की ज़रूरत है!

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इक़बाल हिंदुस्तानी रोज़ देश में सैकड़ों बलात्कार होते हैं तो इतना शोर नहीं मचता? दिल्ली में हुए गैंगरेप की चौतरफा निंदा के साथ यह सवाल भी उठना चाहिये कि देश के विभिन्न राज्यों के दूरदराज़ के  ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में रोज़ होने वाले सैंकड़ों बलात्कार के मामलों को मीडिया कभी इतनी ज़ोर शोर से… Read more »