अखिलेश विरोधियों को बदलना पड़ेगा सियासी चोला

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चचा शिवपाल सिंह यादव तो समाजवादी सेक्युलर मोर्चे की रूपरेखा तक तैयार करने में लग गये हैं,उनके अनुसार मुलायम सिंह यादव इस मोर्चे के अध्यक्ष बनने को तैयार हैं। बकोल शिवपाल, नेताजी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। मगर नेताजी को यही नहीं पता है कि उनकी इस संबंध में शिवपाल से कोई बात भी हुई है। वह तो यहां तक कहते हैं शिवपाल ने ऐसी बात गुस्से में कह दी होगी।

‘जो कुछ भी आज अतीत है वो भविष्य की बात होगी!’ : उत्तरप्रदेश चुनाव

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कीर्ति दीक्षित कैम्ब्रिज के इतिहासकार  एफ. डब्ल्यू. मीटलैंड ने कहा था – ‘जो कुछ भी आज अतीत है वो भविष्य की बात होगी’  ये तथ्य अब भी उतना ही ताजा है । वर्तमान और भूतकाल के परिदृश्य का मूल्याङ्कन करके आप निश्चय कीजिये कि हमारी राजनीति कितनी बदली है। उत्तरप्रदेश गुजरे साल से राजनैतिक अखाडा… Read more »

सबसे बड़ा सवाल कहां हैं मुलायम !

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संजय सक्सेना उत्तर प्रदेश में 17वीं विधान सभा के लिये हो रहे चुनाव कई मायनों में हट के नजर आ रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि पिछले 25-30 वर्षो से यूपी की राजनीति जिन मुलायम ंिसंह यादव के बिना अधूरी समझी जाती थी,वह इस बार चुनावी परिदृश्य से पूरी तरह बाहर हो गये… Read more »

नेताजी की आखिरी स्क्रिप्ट है ये कलह

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अनुश्री मुखर्जी वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में देश में अधिकांशतः केवल एक ही राज्य पर चर्चा होती है, वो है उत्तर प्रदेश। होना भी चाहिए। देश के सबसे बड़ा राज्य में चुनाव। उस पर सत्तासीन सरकार में घमासान। कहां गया महागठबंधन का फॉर्मूला ? यानि जहां योजना बननी चाहिए, वहां मतभेद, वो भी मीडिया में प्राइम… Read more »

सपा के असमंजस में विकल्प की तलाश

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सुरेश हिन्दुस्थानी एक कहावत है कि दुश्मन से तो बचा जा सकता है, लेकिन जब अपने ही दुश्मन हो जाएं तो बचने की उम्मीद किसी भी तरीके से संभव नहीं होती। वर्तमान में समाजवादी पार्टी में कुछ इसी प्रकार के हालात दिखाई दे रहे हैं। जहां अपने ही दुश्मन बनकर आमने सामने आ चुके हैं।… Read more »

हमें राजनीति सापेक्ष बनना होगा

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राकेश कुमार आर्य हमारे देश में प्रजातंत्र की मजबूत जड़ों के होने की बात अक्सर कही जाती है, पर जब हम उत्तर प्रदेश में हो रही राजनीति की वर्तमान दुर्दशा के चित्रों को बार-बार घटित होते देखते हैं, तो यह विश्वास नहीं होता कि भारत में प्रजातंत्र की गहरी जड़ें हैं। उत्तर प्रदेश सहित कई… Read more »

कभी ‘कठोर’ कभी ‘मुलायम’

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राकेश कुमार आर्य  राजनीति कैसे-कैसे खेल कराती है और कैसे आदमी अपने ही बनाये-बुने मकडज़ाल में फंसकर रह जाता है-इसका जीता जागता उदाहरण मुलायम सिंह यादव हैं। एक समय था जब नेताजी भारत की राजनीति को प्रभावित करते थे और दिल्ली दरबार उनके आदेश की प्रतीक्षा किया करता था, आज वही व्यक्ति निढाल, बेहाल,… Read more »

बुढ़ापे की औलाद और लाचारगी

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विवेक सक्सेना समय सचमुच में बहुत बलवान होता है। मजबूत से मजबूत इंसान को ये ऐसे दिन दिखा देता है जिसकी उसने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की होती हैं। अपने नेताजी मुलायम सिंह यादव को ही ले लीजिए। आज कल वे परिवार में चल रही राजनीतिक उत्तराधिकार की लड़ाई से बेहद दुखी है।… Read more »

उत्तर प्रदेश में जारी शह-मात का खेल

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निर्मल रानी देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा के आम चुनावों का समय जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है राज्य की राजनीति में वैसे-वैसे तेज़ी से उबाल भी आता जा रहा है। राज्य की सत्ता पर अपना परचम लहराने की फ़िराक में लगे सभी प्रमुख राजनैतिक दल मतदाताओं को अपनी… Read more »

मुलायम का ‘पिछड़ा-दलित-मुस्लिम’ कार्ड

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संजय सक्सेना पहले बसपा ने और तीन माह बाद सपा ने अपने उम्मीदवार तय कर दिये।यह और बात है कि सपा ने सम्भावित विधानसभा प्रत्याशियों की बाकायदा सूची जारी करके बसपा से बढ़त बना ली।बसपा ने अपने प्रत्याशियों के बारे में मन तो बना लिया है लेकिन अधिकारिक रूप से कोई सूची जारी नहीं की… Read more »