नेताजी की आखिरी स्क्रिप्ट है ये कलह

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अनुश्री मुखर्जी वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में देश में अधिकांशतः केवल एक ही राज्य पर चर्चा होती है, वो है उत्तर प्रदेश। होना भी चाहिए। देश के सबसे बड़ा राज्य में चुनाव। उस पर सत्तासीन सरकार में घमासान। कहां गया महागठबंधन का फॉर्मूला ? यानि जहां योजना बननी चाहिए, वहां मतभेद, वो भी मीडिया में प्राइम… Read more »

यूपी की चर्तुभुज सियासत !

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कहने को कांगे्रस ने ब्राहमण नेता और दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित को यूपी का भावी सीएम प्रोजेक्ट कर दिया है,लेकिन शीला जी को यही नहीं पता है कि अगर कांगे्रस का सपा से चुनावी तालमेल हो जायेगा तो चुनाव में उनकी क्या हैसियत रहेगी। इसके अलावा राहुल गांधी पीएम मोदी को भ्रष्टाचारी साबित करने के लिये कथित तौर पर जो कागज लिये घूम रहे हैं,उसमें शीला दीक्षित का भी नाम है, इससे भी शीला असहज महसूस कर रही है।

आगामी चुनाव जीतने के लिये समाजवादियों का सबसे बड़ा दांव

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनावों से ठीक पहले बसपा , भाजपा और कांग्रेस को परेशान करने के लिये 17 अति पिछड़ी जातियों कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निशाद, कुम्हार,प्रजापति,धीवर, बिंद,भर,राजभर,धीमर, बाथम, तुरहा, गोडिंया, मांझी व मछुआ को एस सी का दर्जा देने का ऐलान किया है। अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के विचाराधीन भेजा जायेगा। सपा सरकार ने यह फैसला करके एक तीर से कई निशाने लगाने का अनोखा प्रयास किया है।

उ.प्र. चुनाव : सपा की रणनीति से विरोधी होगें चित्त !

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बसपा की बात करें तो नोटबंदी के चलते बहनजी चर्चा में रही हैं । आम जनता को नोटबंदी से हुई परेशानी के लिये मायावती ने आवाज उठाई तो भाजपा ने चुनाव में नोट लेकर टिकिट देने की छवि प्रचारित कर इस आवाज को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी । बसपा सपा को अराजकतावादी और भाजपा को साम्प्रदायिक घोषित करते हुये कानून व्यवस्था के मुद्दे पर चुनाव लड़ने जा रही है । विकास की नित नई योजनाओं से अखिलेश अपना पल्लू साफ करके मायावती की इस कोशिश को असफल करने में लगे हैं । कांग्रेस और लोकदल के जनसमर्थन के साथ आने से भी इस काले धब्बे को नकारने में सपा को मदद मिल जायेगी । ऐसे में बसपा का सीधा सामना इस महागठबंधन से होगा ।

यूपी चुनावः हमलावर मोदी, हल्कान विरोधी

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संजय सक्सेना उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अन्य मुद्दों के अलावा पाकिस्तान के खिलाफ की गई मोदी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी का फैसला भी अहम भूमिका निभा सकता है। यह वो ‘आग’ है जिसमें सभी राजनेता अपनी ‘ सियासी रोटियां’ सेंकना चाहते हैं, लेकिन सबको चिंता इस बात की भी है कि… Read more »

राम के नाम चुनावी नैया

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रामाश्रय लेना राजनीतिक दलों के लिए शायद इसलिए जरूरी लग रहा है, क्योंकि उनके पास राज्य के विकास का कोई ठोस अजेंडा नहीं है। साथ ही इतना आत्मविश्वास भी नहीं है कि सिर्फ विकास और सुद्ढ़ कानून व्यवस्था पर वोट मांग सकें, क्योंकि अराजकता पर नियंत्रण कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। इसलिए जाति और धर्म से जुड़े प्रतीकों को विकल्पों के रूप में आजमाने की कोशिशें तेज हो रही हैं

उत्तर प्रदेश में किसकी बनेगी सरकार!

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अभिषेक कांत पाण्डेय इस बार उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी इसकी कवायद तेज होने लगी है। इधर इलाहाबाद में भाजपा कार्यकारणी की बैठक के बाद परिवर्तन रैली से पीएम मोदी ने अपने भाषण से जनता को संदेश दिया की उत्तर प्रदेश में भाजपा आएगी तो वह विकास करेगी। 50 साल का विकास वह पांच… Read more »

यूपीः परवान चढ़ती दावों-वादों-आरोपों की सियासत

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संजय सक्सेना उत्तर प्रदेश में अब विधान सभा चुनाव से पूर्व किसी तरह के कोई चुनाव नहीं होने हैं। इस लिये सभी राजनैतिक दलांे के शीर्ष नेतृत्व ने अपना-अपना ध्यान मिशन 2017 (विधान सभा चुनाव) पर केद्रित कर लिया है।भाजपा,बसपा और कांगे्रस का तो चुनावी मोड में आना स्वभाविक है। सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के प्रदेश… Read more »