लेखक परिचय

श्‍यामल सुमन

श्‍यामल सुमन

१० जनवरी १९६० को सहरसा बिहार में जन्‍म। विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा। गीत ग़ज़ल, समसामयिक लेख व हास्य व्यंग्य लेखन। संप्रति : टाटा स्टील में प्रशासनिक अधिकारी।

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जो रिश्तों पर भारी है

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अपना मतलब अपनी खुशियाँ पाने की तैयारी है

वजन बढ़ा मतलब का इतना जो रिश्तों पर भारी है

मातु पिता संग इक आंगन में भाई बहन का प्यार मिला

इक दूजे का सुख दुख अपना प्यारा सा संसार मिला

मतलब के कारण ही यारों बना स्वजन व्यापारी है

वजन बढ़ा मतलब का———

भीतर से इन्सान वो जैसा क्या बाहर से दिखता है

हालत ये कि सन्तानों संग जिस्म यहाँ पर बिकता है

अपना मतलब पूरा कर लें इसी की मारामारी है

वजन बढ़ा मतलब का———

जीवन मूल्य बचाना होगा मुल्क बचाने की खातिर

पथ के कांटे चुनने होंगे सुमन सजाने की खातिर

उस मतलब से क्या मतलब जो घर घर की बीमारी है

वजन बढ़ा मतलब का———-

 

जीवन है श्रृंगार मुसाफिर

 

जीवन पथ अंगार मुसाफिर,

खाते कितने खार मुसाफिर

जीवटता संग होश जोश तो,

बांटो सबको प्यार मुसाफिर

दुखिया है संसार मुसाफिर,

नैया भी मझधार मुसाफिर

आपस में जब हाथ मिलेंगे,

होगा बेडा पार मुसाफिर

प्रेम जगत आधार मुसाफिर,

फिर काहे तकरार मुसाफिर

संविधान ने दिया है सबको,

जीने का अधिकार मुसाफिर

करते जिसको प्यार मुसाफिर,

देता वो दुत्कार मुसाफिर

फिर जाने कैसे बदलेगा,

दुनिया का व्यवहार मुसाफिर

कहती है सरकार मुसाफिर,

जाति धरम बेकार मुसाफिर

मगर लडाते इसी नाम पर,

सत्ता-सुख साकार मुसाफिर

खुद पे कर उपकार मुसाफिर,

जी ले पल पल प्यार मुसाफिर

देख जरा मन की आंखों से,

जीवन है श्रृंगार मुसाफिर

चाहत सबकी प्यार मुसाफिर,

पर दुनिया बीमार मुसाफिर

प्रेमी सुमन जहाँ दो मिलते,

मिलती है फटकार मुसाफिर

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