लेखक परिचय

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

यायावर प्रकृति के डॉ. अग्निहोत्री अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं। उनकी लगभग 15 पुस्‍तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पेशे से शिक्षक, कर्म से समाजसेवी और उपक्रम से पत्रकार अग्निहोत्रीजी हिमाचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय में निदेशक भी रहे। आपातकाल में जेल में रहे। भारत-तिब्‍बत सहयोग मंच के राष्‍ट्रीय संयोजक के नाते तिब्‍बत समस्‍या का गंभीर अध्‍ययन। कुछ समय तक हिंदी दैनिक जनसत्‍ता से भी जुडे रहे। संप्रति देश की प्रसिद्ध संवाद समिति हिंदुस्‍थान समाचार से जुडे हुए हैं।

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-डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री

राजस्थान सरकार के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने अजमेर दरगाह शरीफ पर कुछ साल पहले हुूए बम धमाके के मामले में कुछ तथाकथित अभियुक्तों के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में जिन आरोपियों को नाम हैं उनमें इन्द्रेश कुमार का नाम नहीं है। यहां तक का किस्सा सामान्य जांच प्रक्रिया का अंग है। परंतु उसके बाद की कहानी राजनैतिक कहानी है। कांग्रेस सरकार का काम केवल इतने से नहीं चलता कि कोई जांच एंजेसी किसी मामले की सामान्य ढंग से जांच करे और संदिग्ध आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर दे। क्योंकि कांग्रेस को केवल आतंकवाद से ही नहीं लड़ना है परंतु आतंकवाद से लडने की आड में अपने वैचारिक और राजनीतिक विरोधियों को भी निपटाना है। नेहरु के जमाने से ही कांग्रेस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना वैचारिक शत्रु मान कर चलती रही है यही कारण था कि जब महात्मा गांधी की दुर्भाग्यपूर्ण हत्या हुई तब पंडित जवाहरलाल नेहेरु ने उस हत्या की आड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निपटाने का प्रयास किया। केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ही नहीं बल्कि वीर सावरकर जैसे स्वतंत्रता सेनानी को भी पंडित नेहरु गांधी हत्या के आड में सदा के लिए या तो जेल के सलाखों के पीछे बंद कर देना चाहते थे या फिर यदि दांव ठीक पडता तो गांधी हत्या के बहाने उनको फांसी पर ही लटका देते। लेकिन यह पंडित नेहरु का दुर्भाग्य रहा कि न्यायालय ने वीर सावरकर को सम्मान सहित बरी कर दिया और हत्याकांड में संघ की किसी प्रकार की भूमिका को भी स्वीकार करने से इंकार कर दिया। लेकिन नेहरु का संघ विरोध इतना गहरा था कि वे सरदार पटेल के भी विरोध में खडे हो गये। क्योंकि पटेल संघ को राष्ट्रवादी सकारात्मक शक्ति के रुप में देखते थे। दुर्भाग्य से आज से कांग्रेस की कमान उस सोनिया गांधी के हाथ में आ गई है जो भारत की सांस्कृतिक पहचान के विरोध में है। इसलिए उसके नेतृत्व में कांग्रेस ने एक बार फिर से संघ को अपना निशाना बना लिया है। इन्द्रेश कुमार को इस पूरे कांड में घसीटना उसकी इसी रणनीति का हिस्सा है। कांग्रेस जानती है कि न्यायालय में वह संघ या इन्द्रेश कुमार को दोषी सिद्ध नहीं कर सकती। इसलिए जांच एजेंसी ने कांग्रेस की इच्छा के अनुसार आरोप पत्र में यह डाल दिया है कि तथाकथित आरोपी इन्द्रेश कुमार से भी मिलते रहे हैं। जाहिर है यह तथाकथित आरोपी हजारों लोगों से मिले होंगे। लेकिन केवल इन्द्रेश कुमार का नाम डालना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस की मंशा संघ को सुनियोजित ढंग से बदनाम करने की है। कांग्रेस जानती है कि जब आरोप पत्र में चलते चलाते ढंग से भी इन्द्रेश कुमार का नाम डाल दिया जाएगा को मीडिया इसे पलक झपटते ही ले उ़ड़ेगा और षडयंत्र में संघ की भूमिका मीडिया में चर्चा का विषय़ बन जाएगी। कांग्रेस की मंशा भी इसी चर्चा को आगे बढाना है। इस चर्चा को आगे बढाने से दो फाय़दे कांग्रेस को हो सकते हैं ( यह अलग बात है कि कांग्रेस लाख चाहते हुए भी यह लाभ उठा नहीं सकेगी )। मुसलमान कांग्रेस से प्रसन्न हो सकते हैं कि कांग्रेस संघ से भीड रही है। बिहार के चुनाव चल रहे हैं और वहां राहुल गांधी की लाख कोशिशों के बावजूद मुसलमान कांग्रेस की ओर मुंह नहीं कर रहे हैं । य़दि बिहार में कांग्रेस मिट जाती है तो राहुल गांधी को लांच करने की सोनिया गांधी की सारी साजिश मिट्टी में मिल जाएगी । इसलिए बिहार में मुसलमान को घेर कर हर हालत में कांग्रेस के पंजे के नीचे पहुंचाना है। इन्द्रेश कुमार और संघ का नाम एटीएस का अंतिम प्रयास है कि बिहार के मुसलमान को किसी ढंग से रिझाया जाए।

वैसे साजिश के संकेत बिहार चुनाव के आस पास कुछ महीने पहले ही मिलने शुरु हो गये थे। जब देश के गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद की बात कह कर सबको चौंका दिया था। पहले ऐसा लगा था कि कि चिंदबरम की जवान फिसलने का यह मामला है। लेकिन जब बाद में चिदंबरम ने अपनी जीभ निकाल कर दिखाया कि उनकी जुबान बिल्कुल ठीक ठाक है और भगवा आंतकवाद का प्रयोग उन्होंने सोच समझ कर ही किया है। राजनीति के तटस्थ विश्लेषक तभी यह आशंका जाहिर करने लगे थे कि मुसलमानों को खुश करने के लिए कांग्रेस ने जो यह नयी अवधारणा उपस्थित की है उसमें रंग भरने के लिए जल्दी ही संघ का नाम भी जोडा जाएगा और यह आशंका सही साबित हो गई है जब एटीएस ने बिना किसी कारण आधार व प्रमाण के अपने आरोप पत्र में इन्द्रेश कुमार का नाम नत्थी कर दिया है।

कुछ दिन पहले राहुल गांधी के इस बयान को कि सिमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक जैसे ही हैं को इसी षडयंत्र के परिप्रेक्ष में देखना होगा।

संघ और इन्द्रेश कुमार का नाम उछालने से एक दो दिन पहले कांग्रेस सरकार की अप्रत्यक्ष सहायता से दिल्ली में कश्मीर के तथाकथित पाकिस्तान समर्थक नेता सय्यैद गिलानी को बुलाया गया। एक सेमिनारनुमान मिटिंग में गिलानी ने बहुत साफ और स्पष्ट शब्दों में कश्मीर की आजादी और उसके लिए लडे जाने वाले स्वतंत्रता संग्राम का केवल समर्थन ही नहीं किया बल्कि उसे प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने की घोषणा भी की। इस कार्यक्रम में गिलानी ने भारत के खिलाफ जी भर कर आग उगली। कार्यक्रम में बैठे कुछ राष्ट्रवादी लोगों ने जब इसका विरोध किया तो उन राष्ट्रवादी शक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मांग की। दिल्ली में गिलानी को बुला कर उसके आगे सिजदा करने की कांग्रेस की यह रणनीति बिहार के चुनाव को ध्यान में रख कर तो बनायी ही गई है। साथ ही इसे लंबी योजना के अंतर्गत मुसलमानों को गोलबंद करने की रणनीति के तहत भी देखा जाना चाहिए।

कांग्रेस की ओर से उसके यह तीन चार कृत्य एक निरंतरता में एक खास उद्देश्य की पूर्ति के लिए किये गये लगते हैं । संघ और इन्द्रेश कुमार का नाम आतंकवादी कृत्यों में उछालना उसी रणनीति का हिस्सा है।

लेकिन कांग्रेस को एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास देशभक्ति और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए लडने वालों का इतिहास है। संघ आतंकवाद में विश्वास नहीं करता, आतंकवाद कायरों की नीति होती है। आतंकवाद में वे गिरोह संलग्न हैं जो इस देश को तोडना चाहते हैं। 1984 में दिल्ली में राजीव गांधी की सहायता से ही सिक्खों पर आतंकवाद का जो घृणित दौर चला था उसके पीछे कांग्रेस ही थी। ऐसा व्यक्तिगत बातचीत में दिल्ली के कई कांग्रेसी नेता स्वीकार भी करते हैं। कांग्रेस सरकार ने उन आतंकवादी साजिशों के सूत्रधरों को पकडने के बजाए उनको बचाने में सरकारी जांच एजेंसियों को इस्तमाल किया। जो थोडी बहुत सजा कुछ लोगों को हुई भी वे केवल इसलिए कि कुछ लोग जान हथेली पर रख कर इन साजिशों का पर्दाफाश करते रहे। कसाब और अफजल गुरु को अब बचाने की जो कोशिशें हो रही हैं वे कांग्रेस की आतंकवाद को लेकर नीति स्पष्ट करती है । कांग्रेस अफजल गुरु की फांसी को मुसलामानों के तुष्ट या रुष्ट होने से जोड कर देखती है। उसकी कोशिश अपने वोटों के लिए आतंकवाद को भी एक खास रंग देने की है। आतंकवाद को भगवा कहना और उसके बाद इन्द्रेश कुमार का नाम उससे जोडना यह इसी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन इतिहास गबाह है कि संघ ने कांग्रेसी सरकारों के ऐसे कई आक्रमणों को झेला है और हर आक्रमण के बाद संघ ज्यादा शक्तिशाली हो कर उभरा है। इस आक्रमण के बाद भी संघ ज्यादा ताकतबर हो कर उभरेगा । इसका मुख्यकारण है कि इस देश के लोग संघ को राष्ट्रवादी शक्ति मानते हैं न कि आतंकवादी।

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13 Comments on "इन्द्रेश के बहाने कांग्रेस का संघ पर प्रहार"

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Naveen Gupta
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राजीव गांधी की हत्या संभवतः चर्च के षडयंत्र के तहत हुई थी। पिता राजीव के अन्दर हिन्दु संस्कार विद्यमान थे। पिता जिवित रहते तो वे राहुल को हिन्दु संस्कार अवश्य देते। लेकिन राजिव की हत्या के बाद राहुल तथा प्रियंका को सारे संस्कार अपनी ईसाई माता से मिले। प्रियंका का विवाह भी एक ईसाई युवक से कराया गया। अब हमे समझना होगा कि चर्च का मानस क्या चाहता है। जो चर्च चाहेगा वही राहुल करेगा। वही कांग्रेस भी करेगी जो चर्च चाहता है। अब सवाल है माननीय ईन्द्रेश कुमार का । चर्च निर्देशित कांग्रेस द्वारा बिना कोई प्रमाण के उन… Read more »
Govind tripathi
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संघ का इतिहास राष्ट्रभक्ति का इतिहास है और कांग्रेस अपने निहित स्वार्थो को पूरा करने तथा Rahul gandhi को राजनीति में स्थापित करने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है कांग्रेस को आज अपना राष्ट्र विघातक एजेण्डा लागू करने की राह में संघ सबसे बड़ा दुश्मन नजर आ रहा है। कांग्रेस और संघ के चाल, चलन, चेहरे और चरित्र में दिन रात जैसा अंतर है आज कांग्रेस की कमान उस सोनिया गांधी के हाथ में आ गई है जो भारत की सांस्कृतिक पहचान के विरोध में है। इसलिए उसके नेतृत्व में कांग्रेस ने एक बार फिर से संघ को अपना… Read more »
amit sahu
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सुरेश ji आपने सही कहा

Ram Gopal
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I had met Shri Indresh, an RSS official, as a Hindu activist along with another Hindu activist, a few years ago. Shri Indresh has been heading the RSS’ wing which is working among Muslims in order to bring them into the main national stream. Two of us did not agree with his approach because we felt that, so long as the Muslims believe in the infallibility of the Quran and Hazrat Mohammed, there can be no meeting ground between Hindus and Muslims. Indresh ji was, however, unnerved and insisted that as the Muslims of India were Hindu converts to Islam… Read more »
श्रीराम तिवारी
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shri suresh chiploonkar ji se shmat hun .congress or bhajpa ko bharteey raajneeti se bahar karo .bhale hi rss ki hi sarkaar kyon na sweekaar karni pade. hm jaante hain ki kuchh logo ko meri baat gale nahin utregi kintu vartmaan men to dono badi paartiyan andruni taur se ek doosre ko samrthan dekr bahar नकली संघर्स को अभिव्यक्त कर रहीं हैं .संघ से में भले ही असहमत हूँ किन्तु यदि वह राजनीतिक तौर से प्रजातांत्रिक प्रक्रिया के तहत भारत की सत्ता में आता है तो कोई आसमान नहीं फट पड़ेगा .हो सकता है की वह गरीबी और भृष्टाचार ख़त्म… Read more »
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