लेखक परिचय

मुकेश चन्‍द्र मिश्र

मुकेश चन्‍द्र मिश्र

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जन्‍म। बचपन से ही राष्ट्रहित से जुड़े क्रियाकलापों में सक्रिय भागेदारी। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और देश के वर्तमान राजनीतिक तथा सामाजिक हालात पर लेखन। वर्तमान में पैनासोनिक ग्रुप में कार्यरत। सम्पर्क: mukesh.cmishra@rediffmail.com http://www.facebook.com/mukesh.cm

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हाल के सम्पन्न हुये उपचुनावों मे बीजेपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली हालांकि वो सबसे बड़ी पार्टी ही बनी रही, जिससे भाजपा से द्वेष की हद तक नफरत करने वाले तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवियों को टॉनिक मिल गया है और लोकसभा मे बीजेपी की जीत पर हुयी कुंठा को निकालने का मौका भी। समाचार चैनलो पर सारे के सारे बुद्धिजीवी भाजपा के लवजेहाद के मुद्दे को उठाने और योगी आदित्यनाथ को यूपी उपचुनाव की कमान देने को हार का कारण मान रहे हैं जबकि हर रोज मीडिया खुद ही अनेकों लवजेहाद के मामले प्रकाश मे ला रहा है, जिसपर समाज का कोई भी सच्चा सेकुलर इनशान या राजनीतिक दल जरूर बोलेगा ही, खामोश वही रह सकता है जिसको इसपर बोलने से अपने वोटों के खो जाने का भय हो तथा वो मुस्लिम तुष्टीकरण मे किसी भी हद तक जा सकता हो।

रही योगी आदित्यनाथ की बात तो वो डंके की चोट पर कहते हैं की वो हिंदुवादी हैं लेकिन सबको साथ लेकर चलना चाहते है ऐसा ही कुछ मोदी जी भी कहते हैं और इन्ही तथाकथित सुपर सेकुलर बुद्धिजीवियों का बस चला होता तो मोदी जी को अभी तक फांसी पर लटका दिया गया होता जबकि आज बहुत से बुद्धिजीवी मोदी जी की  तारीफ करते नहीं थकते, कुछ ऐसे ही आजकल योगी के पीछे पड़े हैं जो हिन्दुवों को संगठित होकर अन्याय का प्रतिकार करने को कहते हैं, जिससे अरब देशो के टुकड़ो पर पलने कुछ लोगो मे खलबली मच जाती है और अनेक कुतर्को से सच को झूठ साबित करने की भरपूर कोशिश करते हैं।

अगर लवजेहाद या योगी के तथाकथित सांप्रदायिक चेहरे के कारण यूपी के चुनाव मे बीजेपी को हार मिली है तो क्या बलात्कार, दंगो, बिजली न देकर लोकसभा के चुनाव का बदला लेने या यूपी मे जंगलराज कायम करने के सपा के एजेंडे की ये जीत है?

अगर सच मे निष्पक्ष होकर इसका विश्लेषण कोई करे तो वो पाएगा की जिस तरह बीजेपी के विरोधी खुश हैं वैसे ही बहुत से या कहें ज़्यादातर इसके समर्थक भी खुश हैं, क्योंकि यूपी के लोगों ने ये सोचकर मोदी जी को वोट दिया था की जब मोदी जी पीएंम बनेंगे तो सपा की सरकार द्वारा जो जुल्म अन्याय उनपर हुये हैं उसका अत्याचारियों को जवाब देना पड़ेगा तथा उनके जख्मो पर मरहम लगेगा लेकिन जब लोगों ने देखा की इनके पीएंम बनते ही उनपर और हमले होने लगे साथ ही बीजेपी कोई सख्त कार्यवाही करने की जगह सिर्फ धरना प्रदर्शन ही करेगी तो लोग उसी समाजवादी पार्टी को चुनने पर विवस हो गये जिससे हो नफरत करते थे क्योंकि सपाई सिर्फ धमकी ही नही दे रहे बल्कि लोकसभा चुनाव का बदला भी ले रहे हैं बिजली काट कर तथा भाजपा समर्थको पर हमले करवाकर, जबकि सहारनपुर जैसा बड़ा दंगा होने के बावजूद बीजेपी खामोश ही रही और राजनाथ जैसे गृहमंत्री हैं जो सिर्फ रिपोर्ट मांगकर खुश हो लेते हैं।

यूपी के लोगों ने अमित शाह के कहने पर 73 लोकसभा सीटों पर भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी को जीत दिलवाई लेकिन वो और मोदी जी दोनों लोग यूपी की कोई खोजख़बर नहीं ले रहे तो ऐसे मे लोगों का गुस्सा तो भड़केगा ही, साथ ही इसबार का उपचुनाव सपा ने जीवन मरण का प्रश्न बना के लड़ा था और हर सीट पर साम दाम दंड भेद जैसे सारे हथकंडे अपनाए थे फिर भी 3 सीट हार ही गयी लेकिन तथाकथित सिकुलरों के कुतर्क सिर्फ भाजपा के ऊपर ही दिखाई देते हैं ये वही लोग होते हैं जो तोगड़िया या योगी जैसे हिन्दू नेतावों पर दिन रात छाती पीटते हैं लेकिन ओवेसी पर इन्हे साँप सूंघ जाता है आसाराम पर महीनो भौंकते हैं लेकिन किसी मौलवी या पादरी के ऐसे कुकर्म को छुपाने का भरपूर प्रयत्न करते हैं।

भाजपा को अब इस बात पर गंभीरता से विचार करना ही होगा की जिन अटल बिहारी बाजपेयी जैसे शुद्ध सेकुलर व्यक्ति को भी आगे रखकर भी भाजपा सम्पूर्ण बहुमत न हासिल कर सकी उसे मोदी जी जैसे तथाकथित कट्टर हिंदुवादी या सांप्रदायिक व्यक्ति ने सम्पूर्ण बहुमत के साथ प्रचंड जीत कैसे दिलवा दी?

अगर भाजपा को ये लगता है की लोगों ने उसके “सबका साथ सबका विकास” के नारे ने जीत दिलवाई है तो ये सच नहीं है, लोगों मे मोदी जी की ऐसी छवि रही है की मोदी जी सबका साथ सबका विकास से आगे दुष्टों और अत्याचारियों का विनाश भी करेंगे साथ ही अपने घोषणा पत्र मे लिखी गयी बातों को पूरी तरह अमल मे भी लाएँगे चाहे वो राम मंदिर निर्माण हो धारा 370 या समान नागरिक संहिता और इसी छवि ने इस पार्टी को इतनी बड़ी जीत दिलवाई है क्योंकि कोई भी समाज बिना विकास के रह सकता है मगर स्वाभिमान से समझौता सायद ही कोई करे। अगर भाजपा अपनी विचार धारा से थोड़ा बहुत भी इधर उधर होती है तो उसका फिर से 2 सीटों पर सिमटना असंभव नहीं, क्योंकि इस पार्टी के समर्थक कांग्रेस, सपा, बसपा आदि पार्टियों के समर्थको की तरह किसी व्यक्ति की वजह से नहीं बल्कि इसकी विचार धारा के कारण इससे जुड़े हुये हैं।

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