लेखक परिचय

वीरेंदर परिहार

वीरेंदर परिहार

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

Posted On by &filed under राजनीति.


वीरेन्द्र सिंह परिहार

 

लोकसभा चुनाव-प्रचार के दौरान नरेन्द्र मोदी इस बात पर बराबर जोर दे रहे थे कि कांग्रेस मुक्त भारत बनाना है। बहुत से लोगों को इस बात से गंभीर आपत्ति थी, और वह नरेन्द्र मोदी की इस सोच को फासिस्ट प्रवृत्ति का दयोतक बताते थे।पर वस्तुतः जब नरेन्द्र मोदी कांग्रेस मुक्त भारत की बातें करते थे, तो उसका सीधा आशय होता था-भ्रष्टाचार मुक्त भारत, पक्षपात रहित भारत, समता-युक्त भारत, जातिवाद मुक्त भारत, साम्प्रदायिकता से मुक्त भारत, परिवारवाद एवं वंशवाद से मुक्त भारत, वोट बैंक की राजनीति से मुक्त भारत, चापलूसी और व्यक्ति-पूजा से मुक्त भारत! कुल मिलाकर ऐसा भारत बनाना जिसमें सभी नागरिक राष्ट्रीय सोच और राष्ट्रीय चरित्र से भरपूर हों। सच्चाई यही है कि विगत कई दशकों से कांग्रेस उपरोक्त सभी बुराइयों की समवेत प्रतीक बन गई थी जिसे आम तौर पर बोलचाल की भाषा में कांग्रेस संस्कृति कहा जाता है। इसलिए जब नरेन्द्र मोदी कांग्रेस मुक्त भारत की बातें करते थे, तो वह देश को उस कांगेस संस्कृति से मुक्त करने की बात करते थे, जिसके चलते देश पिछड़ा है, गरीब है, असुरक्षित है, और लोकतंत्र के सच्चे प्रतिमानों से वंचित है।

नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही उस नेहरू माडल का अंत हो गया है, जिसके चलते देश में पश्चिम का अंधानुकरण हो रहा था। यह अनुकरण सिर्फ भौतिक जीवन में ही नहीं, हमारी जीवन-पद्धति में भी गहरे तक प्रविष्ट हो गया था। एक लेखक के शब्दों में जिसका सबसे बड़ा प्रतीक देश का योजना आयोग था, जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने सोवियत रूस की नकल पर बनाया था। वस्तुतः यह योजना आयोग देश के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा था। जिसमें व्यर्थ में ही देश का 500 करोड़ रूपयें प्रतिवर्ष व्यय हो रहा था। यदि ऐसा कहा जाए कि देश की बदहाली का एक बड़ा कारण यह योजना आयोग था तो कोई अयुक्ति नहीं होगी। क्योंकि देश की जरूरतों के अनुसार इसने लघु उद्योगों और छोटी परियोजनाओं को प्राथमिकता न देकर बडे़ उद्योगों और परियोजनाओं को प्राथमिकता दिया। एक कम पूंजी वाले और ज्यादा बड़ी जनसंख्या वाले देश के लिए ऐसा कतई उपयुक्त नहीं था। पर नेहरू माडल तो प्रत्येक मामले में पश्चिम को ही आदर्श मानता था। भारतीय जीवन मूल्य जो हिन्दुत्व के पर्याय है, उसकी दृष्टि में प्रतिगामी और हेय थे। लेकिन अब नकल के आधार पर नहीं, राष्ट्रीय आकांक्षा, जरूरतों और परिस्थितियों के हिसाब से नीतियां और योजनाएं बन रही हैं। वस्तुतः देश को सबसे अहमत जरूरत इस बात की है कि योजनाओं का क्रियान्वयन लालफीताशाही, भ्रष्टाचार से मुक्त हो, क्योकि तभी किसी योजना का सार्थक परिणाम निकल सकता है। तभी तो मोदी सरकार योजना आयोग की जगह पर निगरानी एवं जवाबदेही आयोग बनाने जा रही है। निःसन्देह राष्ट्र के लिए यह निर्णय युगांतरकारी साबित होगा।

इसी दिशा में एक बड़ा कदम प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह है कि वह जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं। 15 अगस्त को लाल किले से उन्होने बगैर सुरक्षा-घेरे के जनता से सीधा संवाद तो किया ही। 05 सितम्बर शिक्षक दिवस के अवसर पर भी देश के विद्यार्थियों से यानी देश के भविष्य से भी सीधी बातचीत किया। 15 अगस्त के भाषण में जहां उन्होने मेरे को क्या जैसी स्वार्थ-केन्द्रित एवं सब चलता है, जैसी जंगल -राज की मनोवृत्ति पर चोट की, वहीं 05 सितम्बर को उन्होने छात्रों को रट्टू तोता बनने के बजाय सीखने और सम्पूर्ण व्यक्तित्व-विकास पर जोर दिया।

एकात्म मानववाद के प्रणेता पण्डित दीनदयाल उपाध्याय का कहना था, सबसे पहले उनकी चिंता की जानी चाहिए जो सबसे पीछे़ खड़े हैं, सबसे ज्यादा शोषित है, पीडि़त हैं। नरेन्द्र मोदी ने इसी को ध्यान में रखकर जन धन योजना की शुरूआत की है। जिसमें देश के गरीबी से सबसे अंतिम छोर पर खड़ें 15 करोड़ लोगों के खाते खोले जाएंगे। 1.5 करोड लोगों के खाते तो एक ही दिल में खोल दिए गए। इसमें 1 लाख रूपयें दुर्घटना बीमा के साथ 6 माह बाद पांच हजार रूपयें की राशि भी निकाली जा सकेगी। स्वतंत्र भारत का यह सबसे बड़ा समावेशन है, जिसमें बैंक और बीमा दोनों ही सुविधाएं रहेंगी।

मोदी सरकार का संसद द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक आयोग बिल पास करना एक बड़ा ही सार्थक और ऐतिहासिक कदम है। ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय न्यायिक आयोग गठित करने के लिए बीसों वर्षो से चर्चाएं चल रही थीं, पर मोदी सरकार ने उसे एक झटके में ही पूरा कर दिखाया। इस आयोग के गठित होने से उच्च न्यायपालिका में व्याप्त स्वेच्छाचारिता एवं भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण होगा, क्योकि अब उच्च न्यायपालिका यानी सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण करने का काम यह आयोग तो करेगा ही, न्यायाधीशो की शिकायतें भी सुन सकेगा और कार्यवाही कर सकेगा, जबकि अभी तक उच्च न्यायपालिका की शिकायतें सुनने का कोई प्रावधान ही नहीं था। इसके चलते निचली न्यायपालिका में भी स्वतः सुधार हो जायेगा।

कुछ लोग मोदी पर हेड मास्टर होने का आरोप लगाते है, यानी कि वह सबको हांक रहे है, जबकि जैसा मोदी कहते हैं, कि वह टास्क मास्टर हैं। वह सिर्फ अपने मंत्रिमण्डल के सहयोगियों की नहीं, राय लेते बल्कि शासकीय अधिकारियों को निर्भीक होकर अपनी राय देने को कह चुके हैं। इतना ही नहीं आम जनता के विचार और सुझाव आमंत्रित करने के लिए माई गर्वमेन्ट डांट इन बेबसाइट ही बना दी गई है। जिसमें देश के हर तबके के लोग हजारों की संख्या में प्रतिदिन अपनी राय देते एवं समस्यायें बताते हैं। अब राहुल गांधी को भले यह शिकायत हो कि एक ही व्यक्ति की सुनी जा रही है, पर सच्चाई यहीं है कि पूरे देश की, जन-जन की सुनी जा रही हैं। हां कांग्रेस के दौर में जरूर मात्र मां और बेटा ही सब कुछ थे। पर अब जब छोटे-से-छोटे व्यक्ति की भी सुनवायी हो रही है तो यह कहने में कोई झिझक नहीं कि देश कांग्रेंस मुक्त भारत की दिशा में बढ चला है। फाइलों पर कुण्डली मारे बैठी नौकरशाही और महत्वपूर्ण निर्णयों में अनावश्यक बिलंब का अंत इस सरकार ने अपने अल्प-काल में कर दिया है। इसका एक बड़ा कारण स्थापित विभागों में सही समन्वय है। अब अन्ना आन्दोलन या निर्भया आन्दोलन के बतौर सरकार की ओर से यह कहने वाला कोई नही कि तुम कौन हो? हमें बताने वाले, हम तो जनादेश प्राप्त सरकार हैं, निर्वाचित संसद है।अब सबके विकास की भावना को लेकर सरकार पूरी तरह जनोन्मुखी और जवाबदेह हो गई है। सरकार की कार्यपद्धति में आमूल -चूल बदलाव देखने को मिल रहा है। स्वच्छ भारत बनाने की दिशा में शौचालयों के निर्माण को जन आन्दोलन बनाया जा रहा है। पूरे देश में सकारात्मकता का माहौल देखने को मिल रहा है, सरकार में कथनी और करनी में अंतर न होने से प्रमाणिकता आई है। उसमें मानसून निराशाजनक होने के बावजूद कीमतों पर नियंत्रण है, यहां तक कि मुद्रास्फीति की दर इतने कम समय में 3-7 पर आ गई है। मेड इण्डिया नहीं, मेक इण्डिया का नारा प्रभावी है, जिसके तहत अधिक-से-अधिक गुणवत्ता युक्त उत्पादन भारत में हो और यह उत्पादित वस्तुएं पूरे विश्व में बिकंे। भेदभाव और दूरियां सिर्फ खास और आम के बीच ही नहीं, बल्कि शहरों और गांवों में भी खत्म हो रही हैं, गांवों को ब्राडबैण्ड इन्टरनेट सुविधा से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रत्येक खेत को पानी पहुँचाया जाएगा, तो दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत गांवों को चौबीसों घण्टें बिजली उपलब्ध कराई जाएंगी। कंपनी मामलों में अहम बलदाव कर व्यापार-व्यवसाय को सुगम बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है।

देश किस तेजी से कांग्रेस मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है, यह बात उन हाल के सर्वे में देखी जा सकती है, जो महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस के करारी पराजय की भविष्यवाणी कर रहे हैं। बल्र्ड इकोनामिक फोरम के एक अध्ययन के अनुसार मोदी सरकार आने के 100 दिनों बाद ही सरकारी दफ्तरों में पक्षपात घटा है, और भारत की रैकिंग इसमें 98से 49वें आ गई है। सरकारी धन का दुरूप्योग एवं रिश्वतखोरी भी घटी है, जो 110वें क्र. से 93वें क्रम में आ गई है। सबसे बड़ी बात यह कि निराशा और हताशा से डूबे देश में जहां भरोसा और विश्वास खास तौर पर सरकार के मामलों में असंभव जैसे शब्द माने जाने लगे थे, वहां सरकार के प्रति भरोसा और विश्वास बढ़कर 115वें क्रम से 50वें क्रम पर आ गया है। उपरोक्त तथ्य जहां एक ओर यह बताते है कि देश सही दिशा की ओर बढ़ चला है, वही उसका कुल मिलाकर आशय यही है कि कांग्रेस मुक्त होने की ओर बढ़ चला है। क्योकि कांग्रेस संस्कृति का अर्थ ही यह था, पक्षपात, भ्रष्टाचार, झूठे-वायदे और छल-प्रपंच की राजनीति, जिसमें देश मुक्त होने के रास्ते पर चल पड़ा है।

कांग्रेस की तरह मोदी सरकार किसी भी क्षेत्र में तुष्टिकरण की पक्षधर नहीं है। तभी तो पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद जो जबारिया सरकारी बंगलों में जमंे रहना चाहते है, उनके बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए जाते हैं। इससे पता चलता है कि इस सरकार में खास और आम के लिए एक ही कानून है। एक मंत्री द्वारा कुछ पत्रकारों को तोहफें दिए जाने पर प्रधानमंत्री नाराजगी व्यक्ति करते है। आशय स्पष्ट है कि अब इस तरह का प्रबंधन चलने वाला नहीं, जिसमें तनिक भी भ्रष्टाचार एवं गलत प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिल सके। कुल मिलाकर यदि भ्रष्टाचार के मामले में जीरों टालरेन्स की बात की जा रही है, तो उसे व्यवहार में भी बेझिझक उतारा जा रहा है।

उपरोक्त आधारों पर यह कहा जा सकता है कि यह सत्ता परिवर्तन ही नहीं, युग परिवर्तन हैं, राजनीतिक ही नहीं, सांस्कृतिक बदलाव है, अब राजनीति, सत्ता-स्व के लिए नहीं, आम जन के लिए है। सरकारी नीतियां कुछ लोगों के फायदे के लिए, बल्कि राष्ट्र हित की दृष्टि से पूरे अवाम के लिए है। सरकारी नौकरियां पहले की तरह सिफारिश , घूसखोरी के चलते नहीं, गुणवत्ता के आधार पर मिलेंगी।

जैसा कि नरेन्द्र मोदी ने बहुत पहले कहा था, ‘‘न खाता हूँ, न खाने दूंगा।’’ अब सरकार के एक मंत्री कहते हैं, नरेन्द्र मोदी का नया नारा है ‘न सोउंगा न सोने दूंगा।’ कुल मिलाकर मोदी चाहते हैं, देश के प्रत्येक नागरिक, ‘जागता रहे, जागरूक रहे, सावधान रहे। इस तरह से कुल मिलाकर देश की आजादी के बाद देश सुप्तावस्था से महाजागरण की दशा में प्रस्थान कर रहा है। यह जागरण की दिशा ही देश को कांग्रेस मुक्त बनाकर यानी कुशासन दूर कर सुशासन के बल पर गांधी के सपनों का रामराज्य लाने में समर्थ होगी।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz