लेखक परिचय

रामकिशोर पंवार

रामकिशोर पंवार

बैतूल

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गांवों के बाद अब स्कूलों में भी प्रायोजित होने लगी हैं भूतो की स्टोरी….

आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में जहां पर दुनियां का एक मात्र भूतो का मेला लगता हैं उसी क्षेत्र में भूत – प्रेतो के नाम पर डराने धमकाने का धंधा कुछ टीवी चैनल वालो के लिए सनसनी पैदा करने का जरीया बन गया हैं। जहां एक ओर बैतूल जिले की चिचोली जनपद क्षेत्र की मलाजपुर ग्राम पंचायत में गुरू साहेब बाबा की समाधी पर भूतो का मेला लगता हैं। यहां पर अच्छे – अच्छे लोगो के भूत उतर जाते हैं , वही दुसरी ओर चिचोली जनपद मुख्यालय पर स्थित उत्कृष्ट आदिवासी बालिका छात्रावास में इन दिनों सहारा समय , आजतक , इंडिया न्यूज के तीनों तथाकथित स्ट्रींगर रिर्पोटरों के गठबंधन से बैतूल जिले में भूत,प्रेत का सहारा लेकर मासूम स्कूली छात्राओं में भय और अध्ंाविश्वास के साथ – साथ दहशत का भी माहौल तैयार किया जा रहा हैं। टीवी चैनलों पर आने वाले तथाकथित सनसनी , आहट ,जी हारर शो की तर्ज पर गांवो और सुनसान पड़े स्थानो से भय के भूत को साकार रूप देकर परोसा जा रहा हैं। कुछ दिन पहले निरगुड़ में दो हजार लोगो के बीच दहशत की सनसनी खेज $खबर का हमारे द्वारा किया गए खंडन से सबक न लेते हुए एक बार फिर बैतूल जिले से भूत – प्रेत बाधा पर प्रायोजित खबर दिखाई गई। प्रेत बाधा पर आधारित आजतक , इंडिया न्यूज ,सहारा समय पर प्रसाति खबर के बाद सच का सामना करने महाराष्ट्र के विभिन्न जिलो से आई अंध श्रद्धा उन्मूलन समिति के सदस्यों ने उत्कृष्ट बालिका छात्रावास की किसी भी छात्रा को तथाकथित भूत – प्रेत बाधा से पीडि़त होना नहीं पाया। समिति ने अपनी जांच के दौरान पाया कि नगर पंचायत मुख्यालय चिचोली में बैतूल से कुछ दिन पूर्व में आए एक टीवी चैनल के पत्रकार ने स्थानीय छुटभैया नेता की मदद से स्कूल की छात्राओं को टीवी चैनलो पर दिखाने का लालच देकर उनसे पूरी मनगढ़ंत कहानी बनाई। कहानी का द एण्ड तब हो गया जब कुछ छात्राओं ने इटीवी को बताया कि छात्रावास में ऐसी कोई भी आहट सुनाई नहीं दे रही थी। मजेदार बात तो यह हैं कि विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी आइ के बोडख़े बैतूल नगर के निवासी हैं तथा उनके परिवार की बैतूल में पिंजरकर स्टोर्स के नाम की दुकान हैं। जहां पर कुछ टीवी चैनलो के पत्रकारों की आवाजाही बनी रहती हैं। श्री बोडख़े एवं अत्कृष्ट स्कूल प्राचार्य श्री डी के केनकर तथा छात्रावास अधिक्षिक सुश्री पिंकी राठौर ने सोची समझी नीति एवं रीति के अनुसार पिछले 15 दिनो से स्कूली छात्राओं के बीच जानबुझ कर भूत – प्रेत को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया। एक पडय़ंत्र जो कि कुछ टी वी चैनलो द्वारा आयोजित था उसके लिए बकायदा तंत्र – मंत्र साधना , पूजा पाठ , हवन किया गया। बालिकाओं को बकायदा रामायण पाठ पढ़वाने के लिए छात्रावास में रामायण पहुंचाई गई। स्वंय आर के श्रोती सहायक परियोजना अधिकारी भी इस षडय़ंत्र में शामिल थे क्योकि उन्होने अपने भोपाल से आए आला अफसर श्री सेगंर की मौजूदगी में बेव न्यूज पोर्टल यू एफ टी न्यूज को बताया कि स्कूली छात्राए मानसिक रूप से पढ़ाई से भयक्रांत थी लेकिन वे रामायण पढ़ती थी। अब सवाल यह उठता हैं कि स्कूली छात्राओं से छात्रावास परिसर में रामायण का पाठ , मंदिर में पूजन , हवन आखिर क्यों करवाया गया। यदि छात्रावास में भूत था तो उन्हे पास में ही मलाजपुर क्यों नहीं ले जाया गया। अलग से तांत्रिक – मांत्रिक बुलवा कर टीवी चैनल वालों के सामने ड्रामा किसी अनुमति से हुआ। छात्रावास परिसर में पालक के अलावा बाहर के लोगो को खास कर टीवी चैनल वालों को घुसने एवं अंदर जाकर छात्राओं से बातचीत करके उनके दिलो दिमाग में भय का भूत डालने की क्या जरूरत थी। जब इटीवी पर उन चैनलों के मंशा के ठीक विपरीत $खबर प्रसाति की गई तब भी उक्त टीची चैनलों द्वारा अपने स्ट्रींगरों एवं रिर्पोटरों से $खबर की सच्चाई जानने का प्रयास क्यों नहीं किया गया। अंध श्रद्धा उन्मूलन समिति का तो सीधा सीधा आरोप था कि जानबुझ कर दहशत का माहौल पैदा करके कुछ तांत्रिक – मांत्रिक टीवी चैनलो को माध्यम बना कर उन 50 स्कूली छात्राओं के पालको से मोटी रकम ठगना चाहते थे। मध्यप्रदेश में महाराष्ट्र सरकार की तरह अघोरी प्रेक्टीस एक्ट 2005 की तरह कोई कड़ा कानून नहीं है जिसके चलते आदिवासी बाहुल्य जिलों में इस तरह का गोरखधंधा फल फूल रहा हैं। देश के नॅबर वन का तमगा लेकर स्वंय भू टीवी चैनलों को ऐसी भ्रामक $खबरो को जो खास कर स्कूली छात्राओं के भविष्य से जुड़ सकती हैं को प्रसारित करने से पहले सोचना चाहिए। एक भी चैनल यदि चांद पर पहुंचने वाले युग में कोमल मानसिक पटल पर भ्रम का या अधंविश्वास के भूत को बढ़ावा देगा तो आने वाले कल में वह भयभीत होकर दहशत भरा जीवन जीने को बेबस हो जाएगी। चिचोली छात्रावास की घटना का पूरजोर खंडन करते हुए विद्धवान कानूनविद भरत सेन कहते हैं कि हमारे छात्रावासों में यदि तंत्र – मंत्र में शिक्षा अधिकारी , प्राचार्य , अधिक्षक आस्था रखेगें तो देश में आइंस्टीन , न्यूटन, एडीशन जैसे वैज्ञानिक कैसे पैदा होगें? और ऐसे में भारत की कोई भी कल्पना चावला जैसी अंतरीक्ष यात्री कभी नहीं मिलेगी। इस छात्रावास की बालिकाए इस समय गणित और विज्ञान जैसे विषयों से भटक कर भूत – प्रेतो के अस्तीव में खो जाएगीं तो इनके भीतर विज्ञान कैसे पैदा होगा। श्री सेन तर्क देते हैं कि प्रिंट एण्ड इलेक्ट्रानिक मीडिया तंत्र – मंत्र – यंत्र भूत – प्रेत – नजर बाधा निवारण के तांत्रिक प्रयोग तथा तथाकथित आलौकिक शक्तियों का प्रचार – प्रसार – प्रसारण करके अंधविश्वास को बढ़ावा देकर प्रेस एक्ट की मूल भावनाओं का हनन कर रही हैं।

इधर बैतूल जिले के चिचोली नगर पंचायत मुख्यालय पर स्थित आदिवासी बालिका छात्रावास की 50 छात्राओं से यू एफ टी न्यूज ने चर्चा की जिसमें सभी छात्राओं ने एक सिरे से उक्त खबर का खंडन किया। वही मनोवैज्ञानिक डाँ देवेन्द्र बलसारा कहते हैं कि अधिकांश छात्राए 10 एवं 12 की बोर्ड परीक्षा देने के चलते देर रात्री तक पढ़ाई करती हैं ऐसे में उनकी पढ़ाई के चलते पूरी नींद नहीं हो पाती हैं। यहां पर यह देखने को आ रहा हैं कि छात्रावास की अधिकांश आदिवासी छात्राएं बोर्ड परीक्षा में पास – फेल के चक्कर मानसिक तनाव में रहती हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ श्रीमति रश्मी पंवार कहती हैं कि आज के समय में चौदह साल में ही अधिकांश बालिकाओं को मासिक धर्म शुरू हो जाते हैं। ऐसे समय में बालिका कमजारे हो जाती हैं तथा उन्हे मानसिक तनाव भी कई बार उन्हे बहोशी एवं चक्कर आने लगते हैं। पचास में से मात्र तीन ही बालिकाओं को उक्त कथित प्रेत बाधा से पीडि़त बता कर पूरा माहौल को अंधविश्वास की बलि पर चढ़ाया जाना न्योचित नहीं हैं। घटना के पीछे की एक कहानी यह भी बताई जा रही हैं कि नेशनल हाइवे 59 ए बैतूल से इन्दौर पर स्थित इस छात्रावास को किसी सरकारी बैंक द्वारा बीते वर्ष ही किराये पर अनुबंधित कर लिया गया था। सरकारी बैंक इसी वर्ष जनवरी से अपनी शाखा खोलना चाहती थी लेकिन पिछले माह से जब मुख्य मार्ग चिचोली पर स्थित छात्रावास भवन खाली नहीं हुआ तो फिर उक्त कहानी को मूर्त रूप दिया गया था। बताया जाता हैं कि बीते आठ वर्षो से सरकारी दर पर किराये पर चल रहे भवन के मालिक द्वारा कई बार छात्रावास को खाली करवाने का प्रयास किया गया लेकिन जब बात नहीं बनी तो यह कुछ टीची चैनल वालों से मिल कर छात्रावास भवन में भूत – प्रेत होने की बाते फैलाई गई ताकि प्रशासन दबाव में आकर आनन – फानन में उक्त भवन को खाली कर नए छात्रावास भवन में स्थानांतरीत कर दे। हालाकि अब भी उक्त भवन को त्वीत खाली नहीं करवाया जा रहा हैं। परीक्षा सत्र पूर्ण हो जाने के बाद भी छात्रावास नए भवन में जाएगा। इधर सामाजिक कार्यकत्र्ता एवं अनिस से जुड़े श्री राम भलावी का कहना हैं कि उक्त तीनो चैनल पिछले तीन सालों से किसी को नमक खिलाते दिखा रहे हैं तो किसी कुंजीलाल के मरने की भविष्यवाणी करते दिखा रहे हैं। कभी किसी सुनसाने खण्डहर में मुजरा होते और पायल छनकते दिखाते हैं तो कभी किसी खण्डहर को अभिश्रप्त दिखा रहे हैं। श्री भलावी का कहना हैं कि मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा से लगे बैतूल जिले में इन टीवी चैनलों द्वारा अभी तक दिखाई गई सनसनी खेज स्पेशल स्टोरी में से एक ने भी भूत – प्रेत के वजूद को सिद्ध नहीं कर दिखाया हैं।

 

 

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