लेखक परिचय

प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे

विगत 22 वर्षाे से पत्रकारिता में सर्किय हैं। आपके राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विषयों पर 500 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से प्रेरित श्री प्रवीण दुबे की पत्रकारिता का शुभांरम दैनिक स्वदेश ग्वालियर से 1994 में हुआ। वर्तमान में आप स्वदेश ग्वालियर के कार्यकारी संपादक है, आपके द्वारा अमृत-अटल, श्रीकांत जोशी पर आधारित संग्रह - एक ध्येय निष्ठ जीवन, ग्वालियर की बलिदान गाथा, उत्तिष्ठ जाग्रत सहित एक दर्जन के लगभग पत्र- पत्रिकाओं का संपादन किया है।

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-प्रवीण दुबे-
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प्रचंड जनसमर्थन के साथ देश की जनता ने नरेन्द्र मोदी के हाथ सत्ता की बागडोर सौंप दी है। यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस को छोड़ अन्य विपक्षी दल ने अपनी दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया है। यह इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अटल बिहारी वाजपेयी के बाद नरेन्द्र मोदी ऐसे पहले नेता हैं जो प्रधानमंत्री के रूप में आसीन होने जा रहे हैं। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए कि जनता ने जितना प्यार नरेन्द्र मोदी पर लुटाया है उतना आज तक किसी दूसरे विपक्षी नेता को नहीं दिया। ‘अबकी बार मोदी सरकार और अच्छे दिन आने वाले हैं’, का नारा प्रचंड जनसमर्थन के साथ ईवीएम से बाहर आया है। यह इस बात का संकेत है कि इस देश की जनता मनमोहन सरकार की बुरी नीतियों से बेहद परेशान थी और इस परेशानी को दूर करने मोदी के अच्छे दिनों की दिलासा ने उज्ज्वल भविष्य की आशा को जगा दिया। जनमानस नरेन्द्र मोदी के रूप में एक ऐसे व्यक्तित्व के दर्शन कर रहा है जिसमें सामर्थ्य है, भारत की खोई हुई प्रतिष्ठा वापस लाने की, जिसमें शक्ति है इस देश को पुन: विश्व गुरु बनाने की। उसे परम वैभव पर पहुंचाने की। अब नरेन्द्र मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस प्रचंड जनसमर्थन के आशा और विश्वास पर खरा उतरने की होगी। उन्हें अपने श्रेष्ठ नेतृत्व के द्वारा जनता जनार्दन को यह एहसास दिलाना होगा कि वास्तव में अच्छे दिन आ चुके हैं। यदि नरेन्द्र मोदी ऐसा कर पाने में सफल रहते हैं तो निश्चित ही वह जनता के विश्वास और आशा पर खरे उतरेंगे। अब जबकि नरेन्द्र मोदी के सिर प्रधानमंत्री का सेहरा बंधने की सारी बाधाएं दूर हो चुकी हैं और उन्हें सत्तासीन होने में कुछ घंटों का ही समय शेष है, इस बात पर चिंतन करना बेहद आवश्यक है कि आखिर मोदी के सामने बड़ी चुनौतियां कौन सी हैं, आखिर इनसे वह पार कैसे पाएंगे।

महंगाई
पिछले दस वर्षों के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के शासन की बात की जाए तो देश की जनता को सर्वाधिक परेशानी किसी चीज से हुई है तो वह है महंगाई। रोजमर्रा की जरूरतों वाली चीजों के दाम लगातार बढ़ते रहे। आटा, दाल, चावल, सब्जी, पेट्रोल, डीजल, गैस आदि के दाम 2004 से पूर्व सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (अटल) सरकार से तुलना कर देखे जाएं तो तीन से चार गुना तक अधिक जा पहुंचे। जनता त्राहि-त्राहि कर उठी। मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेतहाशा बढ़ती महंगाई को पहले नियंत्रित करना और फिर बढ़े हुए दामों में कमी लाना होगा, तभी अच्छे दिन लौटेंगे।

भ्रष्टाचार
मोदी के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने की होगी। छोटे-छोटे कामों के लिए रिश्वत की परंपरा, कमीशन खोरी पर लगाम लगाने के लिए मोदी को ईमानदारों का चक्रव्यूह तैयार करना होगा। भ्रष्ट नौकरशाही पर लगाम के साथ देश में हुए बड़े-बड़े घोटालों के गुनहगारों को बेनकाब करने की बड़ी चुनौती मोदी के सामने होगी। इससे पार पाना बेहद कठिन काम है लेकिन उन्हें अच्छे दिन के लिए यह करना ही होगा।

आंतरिक सुरक्षा
मोदी के सामने आंतरिक सुरक्षा एक बड़ी चुनौती होगी। देश की जनता में सुरक्षा को लेकर व्याप्त डर के भाव को दूर करने के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी होगा। नारी सुरक्षा और जगह-जगह होने वाली आतंकी घटनाओं को कैसे रोका जाए इसके लिए तुरंत ही कड़े निर्णय लेने पड़ेंगे।

रक्षा क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियां
सीमापार आतंकवाद, अंतर्राष्ट्रीय अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी सहित भारत के सामने रक्षा क्षेत्र की गंभीर चुनौतियां हैं। इसमें अब नई चुनौतियां भी जुड़ गई हैं, जैसे समुद्री और साइबर, आकाशीय चुनौतियां, हमारा समीपवर्ती भू-सामरिक वातावरण ऐसा है कि उसमें पारंपरिक, सामरिक और गैर पारंपरिक रक्षा चुनौतियां सतत सक्रिय रहती हैं। पाकिस्तान, चीन, अमेरिका जैसे देशों की नीतियों पर पैनी नजर रखना और उनके इरादों को भांपते हुए रक्षा तंत्र विकसित करना मोदी के सामने बड़ी चुनौती होगी।

घुसपैठ पर नियंत्रण
भारत जैसे विशाल देश में घुसपैठ विशेषकर मुस्लिम घुसपैठ की समस्या ने देश के सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। एक अध्ययन के अनुसार भारत के विभिन्न हिस्सों में साढ़े चार करोड़ से अधिक मुस्लिम घुसपैठिये कब्जा जमाए हुए हैं। इनमें बांग्लादेशी, पाकिस्तानी आदि शामिल हैं। समय-समय पर यह घुसपैठिये आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा खड़ा करते रहे हैं। देश की सुरक्षा की दृष्टि से इन्हें बाहर करना और लगातार जारी घुसपैठ को रोकना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन अच्छे दिनों के लिए यह बेहद आवश्यक है।

युवाओं की समस्या का समाधान
सर्वविदित है कि इस चुनाव में देश के 17 करोड़ से अधिक युवा मतदाताओं की विशेष भूमिका रही है। इन युवा मतदाताओं ने आशा भरे भविष्य की चाहत में नरेन्द्र मोदी का जमकर समर्थन किया। अब जबकि मोदी के सिर ताज बंधने जा रहा है इस युवा वर्ग की तमाम समस्याओं जिसमें कि बेरोजगारी, उच्च शिक्षा का सरलीकरण, शिक्षा ऋण का सरलीकरण आदि शामिल है का समाधान करना मोदी के सामने बड़ी चुनौती होगी। बेरोजगारी देश की बड़ी समस्या है। कैसी विडंबना है कि एक तरफ तो युवा करोड़ों की संख्या में बेरोजगार हैं तो दूसरी ओर बहुत सारे पेशों (प्लंबर, टीवी मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन आदि) के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति नहीं मिलते। अभी 15 से 29 आयु वर्ग के दो करोड़ 85 लाख युवा बेरोजगार हैं। स्नातक या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त 16.3: शहरी पुरुष और 17.3: शहरी महिलाएं बेरोजगार हैं। जबकि डिप्लोमा और सर्टिफिकेट धारी युवाओं में बेरोजगारी की दर 12.5: है। इसलिए रोजगारोन्मुख प्रतिभा का विकास नई सरकार के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में केवल पारंपरिक शिक्षा के बूते बेरोजगारी से लडऩा संभव नहीं है।

विदेशी कंपनियों पर नियंत्रण
पूरी दुनिया को खुले बाजार के रूप में देखने वाली बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों और उनको संरक्षण देने वाले दुनिया के बड़े पूंजीगत देशों के सामने घरेलू उद्योगों और बाजार का संरक्षण व स्वदेशी को बढ़ावा देने की भी एक कड़ी चुनौती मोदी के सामने होगी।

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