लेखक परिचय

अनिल गुप्ता

अनिल गुप्ता

मैं मूल रूप से देहरादून का रहने वाला हूँ! और पिछले सैंतीस वर्षों से मेरठ मै रहता हूँ! उत्तर प्रदेश मै बिक्री कर अधिकारी के रूप मै १९७४ मै सेवा प्रारम्भ की थी और २०११ मै उत्तराखंड से अपर आयुक्त के पड से सेवा मुक्त हुआ हूँ! वर्तमान मे मेरठ मे रा.स्व.सं. के संपर्क विभाग का दायित्व हैऔर संघ की ही एक वेबसाइट www.samvaadbhartipost.com का सञ्चालन कर रहा हूँ!

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gandhi jiरा.स्व.संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री इन्द्रेश जी, जो पिछले अनेक वर्षों से मुस्लिम समाज के साथ संवाद कायम करने में लगे हैं, के विभाजन और गांधीजी सम्बन्धी बयान पर उबलने वाले कांग्रेसी क्या विभाजन की घोषणा के बाद विभाजन विरोधी गांधीजी का कोई बयान दिखाएंगे?कुछ सवालों के जवाब देश जानना चाहता है:
१)क्या यह सही नहीं है कि जनवरी १९१५ में मोहनदास गांधी को अंग्रेज़ों ने भारत वापिस लौटने के लिए कहा था ताकि वो प्रथम विश्व युद्ध में लड़ने/मरने के लिए उपनिवेश भारत से सैनिक भर्ती करने में उनकी सहायता करें?
२)क्या यह सही नहीं है कि १९२० के नागपुर अधिवेशन में विदर्भ कांग्रेस के नेता डॉ.केशवराव हेडगेवार ने पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव रखा था जिसे मोहनदास गांधी जी ने ठुकरा दिया था?
३)क्या यह सही नहीं है कि लोकमान्य तिलक और अन्य राष्ट्रवादी कांग्रेसी नेता आज़ादी की लड़ाई से कोई सम्बन्ध न होने के कारण खिलाफत आंदोलन के विरुद्ध थे?
४)क्या यह सही नहीं कि खिलाफत आंदोलन के असमय बंद कर देने के कारण मुस्लिम आततायियों ने हिन्दुओं के विरुद्ध जो अत्याचार किये उन पर मोहनदास गांधी का रवैय्या हिन्दू विरोधी था जबकि कांग्रेस की ओर से जांच के लिए नियुक्त एनीबीसेंट द्वारा इसका लोमहर्षक वर्णन प्रस्तुत किया था?
५)क्या यह सही नहीं है कि विभाजन की घोषणा से पूर्व गांधीजी ने कहा था कि ‘विभाजन मेरी लाश पर होगा’?
६)क्या यह सही नहीं है कि विभाजन की योजना के अंतर्गत ही जवाहरलाल नेहरू से अंतरंग सम्बन्धो के कारण ही लार्ड माउंटबेटन को भारत भेजा गया था?
७)क्या यह सही नहीं है कि २ जून १९४७ को दोपहर ११ बजे से दो बजे तक लेडी माउंटबेटन और नेहरू की बंद कमरे में ‘बैठक’ हुई थी?
८)क्या यह सही नहीं है कि बंद कमरे की इस ‘बैठक’ के बाद ही नेहरू जी विभाजन के लिए सहमत हो गए थे?
९)क्या यह सही नहीं है कि सहमति से पूर्व नेहरू ने कांग्रेस कार्यकारिणी से कोई मंत्रणा नहीं की थी?
१०)क्या यह सही नहीं है कि विभाजन की घोषणा के बाद जब गांधीजी को उनकी बात याद दिलाई गयी तो उन्होंने यह कह कर बात बदल दी कि “जवाहर ने हामी भरदी है.तो अब क्या कर सकते हैं?मुझमे अब इतनी ताकत नहीं रही है कि मैं जवाहर की बात के खिलाफ जाकर अनशन करूं.”
११)क्या यह सही नहीं है कि उन्ही गांधीजी को पाकिस्तान को ५५ करोड़ रुपये देने का दुराग्रह करने के लिए आमरण अनशन करने के लिए ताकत प्राप्त हो गयी?
१२)क्या यह सही नहीं है कि गांधीजी के दबाव के कारण ही कांग्रेस वर्किंग कमिटी द्वारा लगभग सर्व सम्मति से प्रधान मंत्री पद हेतु चुने जाने के बावजूद सरदार पटेल ने अपना नाम वापिस लेकर नेहरू का नाम मंजूर कराया था?
१३)क्या यह सही नहीं है कि सरदार पटेल, जो उस समय उप प्रधान मंत्री भी थे,ने अपनी रुग्णावस्था में नवम्बर १९४९ में नेहरूजी को पत्र लिखकर चीन के खतरे के प्रति आगाह किया था और इस विषय पर नीति तय करने के लिए मिलने का आग्रह किया था लेकिन नेहरू ने उस पत्र की पावती तक देने की शिष्टता नहीं निभायी?
१४)क्या यह सही नहीं है कि रा.स्व.स.के तत्कालीन प्रमुख ने कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ में न ले जाने का आग्रह किया था जिसे नेहरू ने नहीं माना और नतीज़तन आजतक कश्मीर एक नासूर बना हुआ है?
१५)क्या यह सही नहीं है कि तिब्बत और चीन के सम्बन्ध में भी उस समय संघ प्रमुख श्री गुरूजी (मा.स.गोलवलकर जी)ने आगाह किया था लेकिन नेहरूजी ने किसी की नहीं सुनी और यह मुद्दा देश के सम्मुख आज भी यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है?
१६)क्या यह सही नहीं है कि सभी बड़े देशों ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का वीटो धारक स्थायी सदस्य बनाने का प्रस्ताव किया था जिसे नेहरू ने जिद करके चीन को दिलवा दिया और आज भारत को स्थायी सदस्यता के लिए पापड बेलने पड रहे हैं?
कांग्रेसी नेताओं, ये देश तुम्हारा भी है.इस देश के प्रति तुम्हारा भी कुछ दायित्व है.अपनी निष्ठाओं को व्यक्तियों से न जोड़कर देशहित से जोड़ो और घटनाओं को पूर्वाग्रह मुक्त होकर देखो और उनपर चिंतन करो तो शायद सच्चाई दिखाई दे सकेगी कि किसकी गलतियों के कारण विभाजन हुआ और तीस लाख लोगों की मौतों और तीन करोड़ लोगों के विस्थापन का जिम्मेदार कौन था.

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