लेखक परिचय

जावेद उस्मानी

जावेद उस्मानी

कवि, गज़लकार, स्वतंत्र लेखक, टिप्पणीकार संपर्क : 9406085959

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-जावेद उस्मानी-

कैसी पलटी है समय की धार।
हमसे रूठी हमारी ही सरकार।
उतर चुका सब चुनावी बुखार।
नहीं अब कोई जन सरोकार।
अनसुनी है अब सबकी पुकार।
बहरा हो गया हमारा करतार।
दमक रहा है बस शाही दरबार।
झोपड़ों में पसरा और अंधकार।
सुन लो अब भी एक अर्ज़ हमार।
आपकी पालकी के हमीं कहार।
जब फिर नाव पहुंचेगी मंझधार।
तब कौन बनेगा फिर तारणहार।

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1 Comment on "कैसी पलटी है समय की धार"

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Nem Singh
Guest

Nice poem,
Samay ki darkinar hai,
har koi yhan palan har hai,
lekin palna hi nahi!

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