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हरिकृष्ण निगम

क्या किसी को विश्वास होगा कि एक स्वतंत्र देश की संसद के किसी पूर्व सदस्य को भी अमेरिका अपने न्यूयार्क स्थित जॉन केनेडी हवाई अड्डे पर विस्फोट दे सकता है। पर हाल में ऐसी ही एक साजिश के लिए न्यूयार्क के ब्रूकलिन फेडरल कोर्ट ने ऐसा निर्णय दिया है। षड़यंत्र का भांडाफोड़ कर प्रशासन ने न्यूयार्क के जॉन केनेडी अंतर्राष्ट्रीय विमान तल के परिसर और भूमिगत तेल की लाइनों के साथ सैकड़ों लोगों को लहूलुहान होने से कैसे बचाया और गायना के पूर्व सांसद अब्दुल कादिर को अंततः कैसे आजीवन कारावास दिलाया। यह उपन्यास से कम रोचक कहानी नहीं है। देश की अंदरूनी सुरक्षा एजेंसियां किस सीमा तक जा सकती है यह आतंकवादियों से जुझने की गंभीरता व सर्वोच्च प्राथमिकता पर भी प्रकाश डालता है।

अब्दुल कादिर और एक वायु सेवा का कार्गो कर्मचारी रसल डेफ्रीटास ने सन् 2006में ही ईंधन के बड़े टैंकों और हवाई अड्डाें के भीतर से होकर जाने वाली पाईप लाइनों के विशाल नेटवर्क को उड़ाने की साजिश की थी। यह तेल अपूर्ति की सुविधाएं मैनहेटन दोच से मात्र 12 मील दूर स्थित थी। अमेरिका एटॉर्नी कार्यालय के एक प्रवक्ता के अनुसार डेफ्रीटास को जनवरी, 2011 में सजा सुनाई जाएगी जब कि तीसरे आरोपी अब्दुल नूर को अपराध स्वीकार करने और षड़यंत्र में सम्मिलित होने के कारण 15 वर्ष की सजा हो सकती है। गायना के अब्दुल कादिर ने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी और अपने पहले के हवाई अड्डे से जुड़े तेल के डिपो के अनुभव के आधार पर कुछ अन्य आतंकवादियों की भर्ती की थी। पूरी कहानी और घटनाक्रम काफी रोचक है और उसे दोहराना देश की सुरक्षा एजेंसियों को शिक्षा भी दे सकता है। अमेरिका को इस षड़यंत्र की भनक जून, 2007 में लग गई थी जिसके बाद वे चौकशी होकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साक्ष्य जुटाने में लग गई थी। क्योंकि वह हवाई अड्डा सर्वाधिक महत्व के पारनमन विंदू के रूप में था उसकी सुरक्षा एक नई चुनौती थी। केनेडी हवाई अड्डे के तेल के टैंक ‘क्वींस’ नामक बरों से होकर आने वाली पाईपलाईनों से जुड़े हैं जिनका नेटवर्क न्यू जर्सी से ही प्रारंभ हो जाता है और बाद में स्टेटन आई लैंड, ब्रूकलिन और प्रसिध्द क्वींस से जुड़कर हवाई अड्डे तक जाता है। कई दिनों तक ‘न्यूयार्क टाईम्स’ वे दूसरे प्रमुख दैनिकों में यही चर्चा होती रही थी कि हवाई अड्डे से लगी पाईप लाइनों व टैंकों की ध्वस्त करने से क्या दूसरे टैंकों की शृंखला में भी विध्वंसकारी आग लगा सकती थी।

इस संभावित हादसे के षड़यंत्र के पीछे छिपे लोगों का पर्दाफाश करने में ‘न्यूयार्क टाईम्स’ के 3 जून, 2007 के अंक में पूरे तीन पृष्ठों का विवरण एक शोध रिपोर्ट के रूप में उसके दस सवांददाताओं की अपनी रिपोर्टों के आधार पर छापा गया था जिसमें से कुछ दूरदराज बैठकर संबंधित आतंकवादी समूहों के अध्ययन के विशेषज्ञ भी थे किस तरह सामान्य दीखने वाले स्थानीय लोगों के तार कहां तक जुड़े हो सकते है तथा किन आतंकवादी समूहों ने ‘अतिरेक इस्लामी विश्वासों की हिंसक प्रवृति’ की घुट्टी पिला रखी थी, इसका विस्तृत उल्लेख इस रिपोर्ट में है।

जॉन. ए. केनेडी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट न्यूयार्क का एक राष्ट्रीय केंद्र बिंदू है लगभग उसी तरह हमारी देश की राजधानी का भूतपूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर दिल्ली का विमानतल है। यहां से हर वर्ष लगभग 45 मिलियन यात्री गुजरते हैं जबकि न्यूयार्क में ही अंदरूनी उड़ानों के लिए ला गुर्डिया सहित एक और नौ सेना टर्मिनल है दूसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा न्यूयार्क में है जो न्यू जर्सी में लगता है। सिर्फ केनेडी हवाई अड्डे से प्रतिदिन 1000 से अधिक उड़ानें भरी जाती हैं। सारा षड़यंत्र प्रारंभिक अवस्था में ही था और षड़यंत्रकारी विस्फोटकों व दूसरे संसाधनों को जुटाने की अपनी विस्तृत योजना अभी बना रहे थे।

इस प्रकरण में मूल रूप से चार व्यक्तियों पर साजिश का आरोप था। उनमें से गायना की पार्लियामेंट का एक मुस्लिम सदस्य 55-वर्षीय अब्दुल कादिर था जो गायना का मेयर भी रह चुका था। एक जमाने में वह केनेडी हवाई अड्डे पर कार्गो लाने व ले जाने का कार्य भी कर चुका था। इस आतंकवादी जाल में न्यूयार्क के ही ब्रूकलिन इलाके में रहने वाले दो और व्यक्ति थे जिनको ट्रिनिडाड में हिरासत में लिया गया था। यह सब इतनी शीघ्रता व सावधानी से न्यूयार्क की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन के कार्यालय द्वारा किया गया कि सारा प्रकरण एक कहानी जैसा लगता है। वे चारों व्यक्ति गायना और ट्रिनीडाड कई बार गए थे जहां ट्रिनीडाड व टेविगों द्वीप में कार्यरत प्रभावी आतंकवादी संगठन जमात-अल-मुसलमीन से परामर्श और सहायता की चर्चा चल रही थी। यह वही संगठन था जिसने 1990 में ट्रिनिडाड में हिंसक वारदातों द्वारा सत्ता हथियाने की कोशिश की थी।

क्रिके ट के खेल से परिचित लोग भलिभांति जानते होंगे कि वेस्ट इंडीज वेन्जुएला के उत्तरी पूर्वी समुद्र तट पर स्थित है जिसकी राजधानी पोर्ट-ऑफ-स्पेन है और कुछ ही दूर आगे उत्तर पूर्व में टोबेगो द्वीप है। इन दिनों यहां लगभग 48 प्रतिशत अफ्रीकी मूल के लोग हैं और 40 प्रतिशत एशियाई देशों से हैं। आतंकवादी योजना को अंजाम दिए जाने के पहले अमेरिका प्रशासन व एजेंसियों का कदम एक बड़े हिंसक हादसे को टालने में कारगर सिध्द हुआ था।

सारे विवरण में एक बात और उभरती है कि सुरक्षा एजेंसियों के छोटे-से-छोटे कर्मचारी को अपने काम में न तो किसी स्थानीय राजनीति के हस्तक्षेप का भय था या उनके कदम उठाने के पहले मीडिया की अनावश्यक टिप्पणी और जांच प्रक्रिया के दौरान उनके अनपेक्षित उत्साह दिखाने का। राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी भी रूप में कोई समझौता यहां स्वीकार नही है। जे. एफ. के एयरपोर्ट केस के नाम से पन्ने रंगे जा सकते हैं पर सारे प्रकरण के मूल में यह बात है कि यदि आतंकवाद से जुझने के लिए सही मायनों में कुछ करना होगा तो हमें पश्चिमी देशों व अमेरिका से सीखना होगा।

एक सुरक्षा विशेषज्ञ की यह टिप्पणी कई बार दोहरायी गई है – इज्राइल या अमेरिका से सीखो, यदि आतंकवाद के राक्षस पर नकेल लगाना है।

* लेखक अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ हैं।

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