लेखक परिचय

डॉ. सुधेश

डॉ. सुधेश

हिन्दी के प्रोफ़ेसर ( जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय , दिल्ली ) अब सेवा निवृत्त, सव्तन्त्र लेखन । कवि , आलोचक , संस्मरण , व्यंग्य एवम् यात्रा वृत्तान्त लेखक । २९ पुस्तकें प्रकाशित ।

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हाथी चल रहा है अपनी चाल

कुत्ते भौंकते हैं पीछे पीछे

भौंकते ही भौंकते बस भौंकते हैं

कर न सकते कुछ

मगर क्यों भौंकते

क्या उस से डरते

नहीं वे हैं वाग्वीर

फिर क्यों भौंकते

उन्हें हाथी से घृणा है

उस की बेढब शक्ल से

उस के तीखे बोल से

उस की चाल से भी

क्योंकि वह क्यों नहीं है उन की तरह

मांसभक्षी सिद्धान्तभक्षी

क्योंकि वह देश को माता समझता

हिन्दी बोलता है ।

हाथी हाथी है हाथी ही रहेगा

कुत्ते देशी हों विदेशी

कुत्ते ही रहेंगे

भौंकना है काम उन का

भौंकते ही रहेंगे

हाथी चल रहा है अपनी चाल

चलता ही रहेगा

कुत्ते भौंकते हैं पीछे पीछे

भौंकते ही रहेंगे ।

 

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