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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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wahida rehmanकंगना रानाउत ने कुछ समय पहले एक और धमाका किया था। अपने संघर्ष के दिनों के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि किसी हीरो से रोमांटिक रिश्तो जोड़ने में किसी हीरोइन की पसंद या नापसंद को तरजीह नहीं दी जाती। कुछ को करिअर की खातिर समझौता करना पड़ता है तो कुछ भावनात्मक सहारे की तलाश में भटक जाती हैं। हर स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान हीरोइन को ही उठाना पड़ता है। मधुबाला से पहले दिलीप कुमार का नाम कामिनी कौशल के साथ जुड़ा। उसे तोड़ने के लिए कामिनी की बड़ी बहन की मौत के बाद उनके घरवालों ने उनकी शादी बहनोई से कर उन्हें कुछ समय के लिए फिल्मों से दूर कर दिया। लौटीं तो फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाने की गुंजाइश काफी सिकुड़ गई।
दिलीप कुमार के करिअर पर कोई खरोच नहीं आई। ‘समाधि’ बनते वक्त नलिनी जयवंत अशोक कुमार के प्यार में पागल हो गईं। उनके रोमांस की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। अशोक कुमार विवाहित थे। वे भी डगमगा गए पर बहनोई शशधर मुखर्जी ने दखल दे दिया। नलिनी का करिअर ज्यादा नहीं चल पाया। सालों बाद ‘नास्तिक’ में वे चरित्र भूमिका में दिखीं और फिर लोप हो गईं। अशोक कुमार शान से बरसों तक फिल्में करते रहे।
कुछेक अपवाद छोड़ दिए जाएं तो हीरोइनों का करिअर वैसे ही सीमित समय का होता है। उस पर अगर रोमांस के आधे-अधूरे छींटे पड़ जाएं तो वह और सिकुड़ जाता है। ‘लैला मंजनू’ और ‘अंखियों के झरोकों से’ से ख्याति पाने वाली रंजीता ‘हादसा’ बनते वक्त फिल्म से ज्यादा फिल्म के हीरो-निर्देशक अकबर खान में रूचि लेने लगीं। मामला दो तरफा था। फिल्म के प्रमोशन के लिए उस रोमांस का इस्तेमाल नहीं किया गया

इसलिए जाहिर है कि रिश्तें में आत्मीयता भी रही होगी। उसे मजबूती देने के लिए रंजीता ने करिअर को अनदेखा करना शुरू कर दिया नुकसान दो तरफा हुआ। ‘हादसा’ चली नहीं। अकबर खान से रिश्ता टूट गया और करिअर में बड़ा सा शून्य आ गया। अकबर खान से पहले रंजीता का नाम मिठुन चक्रवर्ती से जुड़ा था। साथ छूटा तो मिठुन और श्रीदेवी की करीबी सुर्खियों में आ गई। मिठुन तो इन सबसे बचते निकलते ‘मर्द’ वाली हेलेना ल्यूक्स से नाता तोड़ कर योगिता बाली के दूसरे पति बन गए। कई ‘रिश्ते’ निभा लेने के बाद मिठुन के करिअ पर तो कोई खरोंच नहीं आई, हेलेना गुम हो गईं और रंजीता टूटते रिश्तों के बीच अरसे तक के लिए अकेली रह गईं। ऐसे ही टूटी-बिखरी कुछ अन्य अभिनेत्रियों की तरह वे चरित्र भूमिकाओं में उतरने का उत्साह भी बनाए नहीं रख पाईं।

हीरो कितने भी रोमांस क्यों न करें, उसका मन नहीं घटता। किसी रिश्ते के लिए वह प्रतिबद्धता न दिखाए तो भी उसके दोष का ठीकरा हीरोइन के सिर ही फूटता है। हीरोइन अगर प्रेम करें तो लांछित हो, हीरो कर तो उसका गौरव बढ़ जाए, यह उलटबांसी फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा चलती रही है। ‘डॉन-2’ के वक्त शाहरुख खान से प्रियंका चोपड़ा का नाम जुड़ा तो प्रियंका चोपड़ा को ही लताड़ मिली। शाहरुख खान पर कतई उंगली नहीं उठी।
प्रियंका पर बसी बसाई गृहस्थी को उजाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगा। करीब डेढ़ दशक के वैवाहिक रिश्ते को नए प्रेम पर कुरबान कर देने वाले सैफ अली खान, आमिर खान और बोनी कपूर कभी कठघरे में नहीं आए। बहरहाल ‘डॉन-2’ के प्रकरण के बाद शाहरुख खान व प्रियंका चोपड़ा किसी फिल्म में साथ दिखेंगे, इसके आसार कम हैं। चाहे अनचाहे बन गए या गढ़ दिए गए रिश्तों की कीमत प्रियंका ने पहले भी चुकाई है। ‘मिस वर्ल्ड’ का खिताब जीतने के बाद फिल्म ‘अंदाज’ से उनकी और अक्षय कुमार की जोड़ी हिट हो गए।

चर्चा गरमाई की ऑफ स्क्रीन रिश्ते की आग भड़काने की पहल कथित रूप से प्रियंका की तरफ से हुई। विवाहित अक्षय भी कहते हैं गंभीर हो गए थे। गृहस्थी में तनाव हुआ तो सुलह इस बात पर हुई कि अक्षय भविष्य में प्रियंका के साथ कोई फिल्म नहीं करेंगे। शादी से पहले भी रवीना टंडन, शिल्पा शेट्टी आदि से नाम जुड़ना अक्षय की ख्यात पर कोई दाग नहीं लगा पाया था। प्रियंका अगर खुद को संभाल कर अंतरराष्ट्रीय फलक पर छाने की हिम्मत नहीं जुटाती तो गायब हो गई होतीं। अक्सर फिल्म के प्रति दिलचस्पी बढ़ाने के लिए हीरो-हीरोइन के बीच रोमांस की चर्चाएं फैला दी जाती हैं। यह क्योंकि दोनों की सहमति से होता है इसलिए एक फिल्म के बाद गुब्बारे की हवा निकल जाती है। जेल से छूटने के बाद ‘खलनायक’ से संजय दत्त की वापसी को दमदार बनाने के लिए उनके और माधुरी दीक्षित के बीच प्रेम होने की खबरें उड़ा दी गईं। दोनों ने इस थोपे गए प्रेम को अपने व्यवसाय के एक हिस्से के रूप में लिया

इसलिए जैसे गुबार उठा था, वैसे ही थम गया। लेकिन जब कोई हीरोइन इस प्रायोजित प्रपंच में गंभीर हो जाती है तो आयशा जुल्का की तरह उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। अरमान कोहली के साथ उनकी ‘औलाद के दुश्मन’ वैसे भी चल जाती, उस पर फिर भी दोनों के रोमांस का नियोजित छौंक लगाया गया। सचमुच एक रिश्ता पनपने की नीव बन गई पर वह जल्दी ही मिट गई। कमी किस पक्ष की तरफ से रही, यह तय करना आसान नहीं है लेकिन करिअर तो आयशा का ही डांवाडोल हो गया। अरसे बाद ‘सोचा ना था’ में वे दिखीं भी लेकिन इस नई पारी को वे ज्यादा विस्तार नहीं दे पाईं।

रोमांस का दुखद अंत

आमतौर पर खोखले रिश्तों की बुनियाद पर खड़ी मायानगरी में संवेदनहीनता का यह आलम है कि हर टूटते रोमांस की सजा सिर्फ हीरोइन को ही भुगतनी पड़ी है। यह समाज में व्याप्त और स्वीकार्य पुरुष प्रधान मानसिकता का असर है जो आधुनिक और प्रगतिशील होने का दंभ भरने वाली फिल्मी दुनिया की रीति-नीति को दकियानूसी बनाए हुए है। हालांकि कुछ अपवाद भी सामने आए हैं। कुछ रोमांस विश्वास पर लगातार टिके रहे तो कुछ का नतीजा हीरो को ज्यादा भुगतना पड़ा।

फिल्मकार चेतन आनंद और प्रिया राजवंश ने आखिर तक शादी नहीं की। प्रिया ने इसका आग्रह भी कभी नहीं किया और अपन रिश्ते को खुलकर स्वीकार भी किया। दोनों का साथ प्रेम, सामंजस्य और आपसी विश्वास की मिसाल था जिसमें कोई स्वार्थ आड़े नहीं आया। एक दूसरे का लाभ उठाने की इच्छा उसमें नहीं थी। चेतन आनंद ने ‘हकीकत’ से लेकर अपनी हर फिल्म में प्रिया को लिया। कुछ फिल्में चलीं, कुछ नहीं चलीं। लेकिन दो दशक का
यह साथ प्रिया में करिअर को लेकर कभी कोई महत्वाकांक्षा नहीं जगा पाया। उन्होंने बाहर की कोई फिल्म की ही नहीं। यही रिश्ता वी शांताराम और संध्या का रहा। उनकी अधिकृत रूप से शादी नहीं हुई या नहीं, यह सवाल हमेशा अनसुलझा रहा। संध्या ने शांताराम की फिल्मों के अलावा किसी और फिल्म की तरफ रुख नहीं किया जबकि अगर वे चाहतीं तो अपने नृत्य कौशल के बल पर ढेरों फिल्में बटोर सकती थीं। इन रिश्तों में प्रेम था, श्रद्धा थी और एक दूसरे का पूरक बनने की लगन थीं।
लेकिन इस तरह के रिश्ते आम तौर पर शक्ल नहीं ले पाते। कई तरह के कारण उसमें बाधा बन जाते हैं और उसका अंत बेहद दुखद होता है। इसकी दो बड़ी मिसाल है। फिल्म निर्माण के शुरुआती दौर में ‘बांबे टाकीज’ सबसे ज्यादा व्यवस्थित व प्रतिष्ठित फिल्म कंपनी थी। हिमांशु राय ने अपनी पत्नी देविका रानी के साथ इसकी स्थापना की थी। देविका रानी फिल्मों में अभिनय के अलावा निर्माण व्यवस्था भी संभालती थीं। हिमांशु राय से उनका प्रेम विवाह हुआ लेकिन दिल पर तो किसी का जोर नहीं चलता।
देविका रानी का दिल कंपनी के एक अभिनेता नजमुल हक पर आ गया। एक दिन दोनों कहीं भाग गए। सदमे से हिमांशु राय बीमार पड़ गए। बांबे टाकीज के सहयोगियोन ने किसी तरह समझा बुझा कर देविका रानी को लौट आने के लिए राजी कर लिया। नजमुल को कंपनी से निकाल दिया गया। हिमांशु राय भी ज्यादा समय जिंदा नहीं रहे। शशधर मुखर्जी, अशोक कुमार आदि के नाता तोड़ लेने के बाद ‘बांबे टाकीज’ की हालत खस्ता हो गई।
देविका रानी ने कुछ साल तक ‘बांबे टाकीज’ को खींचतान कर चलाया। फिर उसे बेच-बाच कर रूसी कलाकार रोरिख से शादी कर अल्मोड़ा में अपना डेरा जमा लिया। नजमुल हक को भारत में कोई फिल्म नहीं मिली। पाकिस्तान जाकर भी उनके भाग्य नहीं फिरे।
वहीदा रहमान कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि गुरुदत्त से उनका रिश्ता सिर्फ फिल्मकार व अभिनेत्री का ही रहा। उन्हीं की आपत्तियों की वजह से गुरुदत्त की जिंदगी पर बनने वाली फिल्म अटकी हुई है। समस्या यह है कि जिस तरह की चर्चाएं रहीं उसके मुताबिक गुरुदत्त और गीता दत्त के वैवाहिक जीवन में तनाव का मुख्य कारण वहीदा रहमान का तीसरा कोण बनना था। इसे गुरुदत्त का एकतरफा प्रेम भी कहा जा सकता है।
हैदराबाद में पेड़ के नीचे खड़ी बारिश में भीगती वहीदा रहमान को देख कर उन्हें मुंबई लाकर स्टार गुरुदत्त ने ही बनाया। वहीदा कब गुरुदत्त के वैवाहिक जीवन में तनाव ले आईं पता ही नहीं चला। लेकिन मामला इतना गंभीर हो गया था कि गुरुदत्त की फिल्म ‘कागज के फूल’ को उनके व्यक्तिगत जीवन पर केंद्रित माना गया। उन दिनों खबर यह भी उड़ी कि ‘मुझे जीने दो’ की आउटडोर शूटिंग में पहुंच कर गुरुदत्त ने अपनी पीड़ा वहीदा को बतानी चाही।
विवाद उभरने के बाद वहीदा ने उनसे दूरी बना ली थी। बीच में सुनील दत्त आ गए और कहते हैं कि उन्होंने गुरुदत्त को चांटा रसीद दिया। आखिरी दिनों में गुरुदत्त शराब के नशे में धुत रहने लगे। और उसी वजह से उनकी मौत हो गई, बिल्कुल ‘कागज के फूल’ वाले निर्देशक के अंदाज में।

अशोक यदुवंशी

नया इंडिया न्यूज़

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