jivan1मैं, मैं हूँ

तुम, तुम हो

वह भी, वह ही है

यह सत्य है

जानते हैं हम सब

यह सब .

पर,

इतना ही

जानना -समझना

क्या

जीवन का लक्ष्य है ?

या

यह भी

जानना-समझना-मानना

कि

कहीं-न-कहीं

एक दूसरे में हैं हम

अन्यथा

वाकई अधूरे हैं हम !

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