लेखक परिचय

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

वैभवपूर्ण जीवन को भारतमाता के श्रीचरणों की सेवा में समर्पित करने वाले ख्‍यातलब्‍ध कैंसर सर्जन तथा विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्‍ट्रीय महामंत्री।

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 डॉ. प्रवीण तोगडि़या

मुंबई में पुन: जेहादी हमले हुए। बीस से अधिक भारतीयों ने अपनी जान गंवा दी। 20 से 50 उम्र के ये लोग घर के कमाने वाले हाथ थे – बूढ़े माँ-पिता के, छोटे-छोटे बच्‍चों के पालनकर्ता थे-30 से अधिक लोग गंभीर घायल है-कोई हाथ, कोई पैर, कोई रीढ़ की हड्डी कायम रूप में गंवाकर कमाने में असमर्थ हो गए हैं-ऐसे में जिम्मेवार, संवेदनशील सरकार को क्या करना चाहिए? परिवारों से मिलकर मॉफी मांगनी चाहिए कि उनकी रक्षा करने में असमर्थ रहे, उन्हें सांत्वना देना चाहिए. लेकिन इतनी बेशर्मी कि अपनी निकम्मेगिरी का ही समर्थन करने लगे हमारे विद्वान गृह मंत्री! इतना ही काफी नहीं था!

हमले मुंबई में हुए और ओडिशा में जाकर ‘राजपुत्र’ राहुलजी आकाशवाणी कर रहे हैं ऐसे आविर्भाव में चिकने चोपड़े चेहरे पर सिनेमा स्टाईल स्मित लाकर कह बैठे, अमेरिका पर भी हमले होते हैं! उनके सैनिकों पर अफगानिस्तान और ईराक में हमले होते ही है ना। फिर भारत में भी 1-2 ऐसे हमले होते ही रहेंगे, हम 99 फीसदी उन्हें रोकेंगे, 1 फीसदी हमले होंगे ही। भारत को अफगानिस्तान और ईराक के स्तर पर ला खड़ा कर दिया और भारत के इस भविष्य के प्रधानमंत्री ने ? मरे हुए लोग जीते-जागते जीव थे, उनके पीछे रोते माँ-पिता, पत्नी-बच्चे भी जीते-जागते जीव हैं, कोई मशीन नहीं जो उनके मुँह पर ऐसे परसेंटेज के आंकड़े फेंके! भारत को ईराक, अफगानिस्तान ही बनाना था इन को? यही तो एजेंडा है जेहादियों का कि भारत को दारुल इस्लाम बनाए और ‘राजपुत्र’ भी उनके एजेंडे को भारत पर थोप रहे हैं?

शर्म नहीं आती भारत की तुलना ऐसे देशों से करने में जहाँ से हिंदुओं को, बौद्धों को मार कर खदेड़ा गया और इस्लाम का कानून कायम किया गया? अफगानिस्तान के जेहादी थपेड़े में घर बार छोड़कर आये कई लोग आज भारत में हैं, उन्हें पूछे राहुल बाबा कि तब क्या था, अब क्या है! और अब भारत को भी जेहादियों के हाथ दे रहे? मुंबई को 9/11 के बाद का सुरक्षित न्यूयार्क बनाने का सपना नहीं, उसके लिए मेहनत नहीं; मुंबई को काबुल-कंधार बनाने निकले यह यह कहकर कि 1-2 हमले होते ही रहेंगे? क्या यही इन के पक्ष का चुनावी घोषणा पत्र है?

होगा ही!

क्योंकि आज कल बच्चा बोले, दल हाले! बच्चा के भोंकने वाले….., जो भारत के मध्यवर्ती राज्य में चुनाव हारकर लम्बा शासन खो चुके हैं, वे ‘दिग-पराजय सिंग’ तो बस इसी में लगे रहते हैं कि किसी तरह भारत में होने वाली हर आपदा और हर हमले के लिए हिंदुओं को, साधु-संतों को और हिंदू संगठनों को ही जिम्मेवार बनाया जाय और जेल भेजा जाय! आजमगढ़ जायेंगे, जेहादियों के परिवारों के आंसू पोंछेंगे, पोलिस ने उनके जेहादी बेटे का ‘फेक एन्काउन्टर’ किया कहेंगे, यह भी बार-बार कहेंगे कि हिंदुओं को जेल भेजने के बाद 6 महीने में भारत में आतंकी हमले नहीं हुए!

राहुल बाबा के यह सिपाह-सालार मानते ही नहीं कि वाराणसी भारत में है-वाराणसी का धमाका, उसमें मारी गयी काशी विश्वनाथ के पुजारी की मासूम 2 वर्ष की बेटी और 20 घायल उन्हें नहीं दिखते? उनके लिए तो अब मुंबई भी भारत में नहीं आता होगा! शायद ईराक में या अफगानिस्तान में आता होगा! दिल्ली, बेंगलूरु, जयपुर, पुणे, ऐसी अनेक जगहें भी दे दी अफगानिस्तान को?

बेशर्मी की इन्तिहां देखिये-विद्वान गृहमंत्री रात को मुंबई गए और सुबह मीडिया से बात करने में डेढ़ घंटा बिताया. साथ में राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, उप मुख्यमंत्री, पोलिस के प्रमुख सब को लेकर बैठे मीडिया से बात करने. कहा तो क्या कहा? ‘हमारे पास कोई खुफिया जानकारी नहीं थी कि यह हमला होगा। अपनी निकम्मेगिरी का मीडिया में विज्ञापन दे रहे थे या समर्थन? उन्होंने भी देश के मुँह पर केवल आंकड़े फेंके-23 मरे, 23 गंभीर घायल, 200 घायल, 31 महीने के बाद मुंबई पर फिर से हमला हुआ। मीडिया ने कुछ अधिक पूछना चाहा तो मीडिया को डांटा! गए तो गए, साथ में एन.आय.ए. की टीम को लेकर गए जिन्होंने जब से गठन हुआ, केवल हिंदुओं को, संतों को और हिंदू संगठनों के लोगों को ही जेल भेजने का काम किया है। कहाँ थे एन.आय.ए. के लोग जब मुंबई की सच में समर्थ पोलिस राष्ट्रीय खुफिया जानकारी चाहती थी? हिंदुओं को झूठी ‘केसों’ में ‘फिट’ कराने में एन.आय.ए. लगी थी और है। इसी एजेंडा के तहत ‘पोटा’ हटाकर एन.आय.ए. का गठन हुआ. कौन हैं उसमें? काश्मीर के कट्टर हिंदू विरोधी ऑफिसर, दूसरे अल्पसंख्यक हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश की उस महिला पोलिस ऑफिसर से विवाह किया जिन्होंने राम मंदिर-बाबरी केस में हिंदुओं के विरुद्ध जान बूझकर कोर्ट में स्टेटमेंट दिया था. ऐसे लोग भारत के बहुसंख्‍यकों को क्या न्याय देंगे?

संतों पर, हिंदू सगठनों के लोगों पर मार पीट कर दबाव में अनेक लोगों को फंसाने में ये लगे हैं, उन्हें मुंबई ले ही क्यों गए भारत के गृहमंत्री? मुंबई की, महाराष्ट्र की पोलिस पर भरोसा नहीं या उनके अपने ही पक्ष/साथियों के सरकार पर भरोसा नहीं? ये एन.आय.ए. वाले और कुछ ए.टी.एस. वाले कुल 10-12 लोग 2 सप्ताह पहले नागपुर जाकर हिंदू संगठनों के वृद्ध लोगों को-जो बेचारे ऑफिस में बैठे थे-धमकाकर आये हैं! इतना संख्याबल और इतना समय अगर मुंबई को और देश को जेहादियों से कैसे बचाया जाय, इस पर लगाते, तो कई हमले रुक भी सकते थे! लेकिन उन्हें तो केवल हिंदुओं को द्वेष से जेल भेजना है! हिंदुओं को जेल भेजने के लिए अब नया कानून भी बना रहे हैं ये ही लोग, जिस विषय में फिर विस्तार से लिखूंगा।

मुंबई में जहाँ धमाके हुए, वे तीनों स्थान मुंबई के आर्थिक स्थान हैं-झवेरी बाजार में हीरे-जवाहरात और सोने-चांदी की करोड़ों की उलाढाल रोज होती हैं, ओपेरा हाउस क्षेत्र में सोना-चांदी, हीरे के अलावा कपड़ा व अन्य व्यवसायों की लेन-देन करोड़ों में होती हैं। दादर के कबूतरखाना परिसर में छोटे दुकानदार, सब्जियाँ आदि का व्यवसाय चलता है और वहाँ आम आदमी ट्रेन से उतरकर बस की सर्विस लेने रुकता है। इन सभी व्यवसायों से सरकार को करोड़ों की आमदनी करों में होती है, नौकरी-पेशा लोग भी करोड़ों रुपये करों के रूप में दे रहे हैं, विदेशों में ख्यात हमारे देश के हीरे जैसे व्यवसायों से कर चाहिए। लेकिन उनको सुरक्षा नहीं देंगे?

सरकारों का जिम्मा है-वह पूरा करने की बजाय गृहमंत्री कहते हैं कि जहाँ ये लोग चाय-नाश्ता खाते हैं ऐसी खाऊ गली-जो मुंबई का लैण्डमार्क है-वह संकरी है, सामने मुंबई का प्राचीन मंदिर है, कैसे सुरक्षा देंगे! कहते हैं, दादर में भीड़ है, कैसे सुरक्षा देंगे! सी सी टी वी कैमरे लगे हैं वे क्या धमाकों के बाद फिल्म या डोक्युमेंट्री बनाने के लिए? धमाके के पहले उन पर ध्यान देना, उन का विश्लेषण करना सरकार का काम नहीं? इस की जगह, गृहमंत्री राज्य सरकार की और मुख्यमंत्री केंद्र सरकार की स्तुति करते डेढ़ घंटा मीडिया के सामने बकबक कर रहे थे! पोलिस अपना काम ठीक करती हैं यदि उनके काम में इन बेशर्म राजनेताओं की दखलंदाजी ना हो! फिर भी ये निकम्मे नेता ऊटपटांग बातें कहते रहते हैं और निष्पाप लोग मरते रहते हैं! इसे यदि बेशर्मी की पराकाष्ठा नहीं तो क्या कहें!

बेशर्मी इन सरकारों की इतनी की अब तक 26/11 मुंबई हमला या 5 वर्ष पहले हुआ मुंबई रेल धमाके या वाराणसी धमाका इन में या तो कोई तपास नहीं, या कसाब, अफजल जैसे बिरयानी खाकर मजे कर रहे हैं! किसी ने झूठा कहा मुंबई पर यह हमला हुआ वह कसाब का जन्‍मदिन था! 23 जीते जीवों को मारकर, 23 को कायम रूप से अपाहिज बनाकर और बाकी सभी को सदमा देकर मनाया उस का जन्म दिन जेहादियों ने और राहुल बाबा भारत को अफगानिस्तान, ईराक के स्तर पर ले जाता है, गृहमंत्री आंकड़े फेंकते हैं! कल भारत में भूख से और अधिक लोग मरेंगे तो यही ‘राजपुत्र’ कहेगा, सोमालिया में तो रोज भूख से लोग मरते हैं!

इनके आदर्श क्या है? भारत के प्रति सम्मान नहीं, भारत की सुरक्षा करना आता नहीं, तो छोड़े दें सत्ता ये सभी लोग और दे भारत सेना के और हिंदुओं के हाथ में, हिंदू नि:शस्त्र हैं। लेकिन कायर या मतों के भिखमंगे तो नहीं! हमारी माँ, बेटियाँ, बहनें भी बेलन लेकर निकलेंगी और पाक को मिटा देंगी, आधी स्वयं का बलि देंगी लेकिन दुर्गा बनना उन्हें भी आता है! हमारा हर बच्चा सुदर्शन चक्र वाला कृष्ण बन सकता है. बेशर्मों की, निकम्मों की सुरक्षा-जो केवल जेहादियों के लिए ही उपलब्ध है-के भरोसे बैठे रहे तो सच में भारत को ईराक, अफगानिस्तान कर देंगे ये बेशर्म लोग! लोकतंत्र का तमाशा बनाकर भारत को विनाश की गर्त में डाल रहे हैं यही बेशर्म निकम्मे लोग। अभी भारत स्वयं को सम्हालें, वरना बहुत देर हो जायेगी!

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