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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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bananaऐतिहासिक नगरी कौशांबी आज अपने फल केले के कारण विश्व में चर्चा का केन्द्र बिन्दु बन गई है। ज्ञात हो कि कौशांबी का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों से अंकित है। आज यही कौशांबी अपने फल केले के कारण विश्व पटल पर चर्चा में है। विश्व प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश की कौशांबी केले की खेती में कोई सानी नहीं है। कौशांबी के केले के रेसे से जर्मनी में नोट का उत्पादन होगा, दूसरी तरफ इसके केले का लाभ लेने में इंडोनेशिया और जापान भी नहीं चूंके हैं, वे केले के रेसे से कपड़ा तैयार करेंगे।

इन सबको ध्यान में रखते हुए इसे विदेश निर्यात के लिए तैयारी पूरे जोर-शोर से हो रही है। जाहिर है इसकी मांग को देखते हुए इसके उत्पादन की भी भारी पैमाने पर तैयारी हो रही है। केले की बढ़ती मांगों को देखते हुए कौशांबी के किसान बहुत उत्सुक हैं। साथ-साथ यहां का उद्यान विभाग भी कौशांबी के केले की महिमा कहते हुए थक नही रहा है। ज्ञात रहे कि मशीन से रेशे निकालने के लिए पिंडरा सहाबनुपर गांव में इसका परीक्षण भी हो चुका है जो पूरी तरह से सफल है।

केले के एक तने से एक किलो रेशा की प्राप्ति होगी। इसके रेशे का उपयोग देश में भी जमकर होगा। राज्य में इसके रेशे से मक्खन के डिब्बे पर उपयोग किया जाने वाला चमकीला कागज और कैनवास पेपर का भी निर्माण किया जाएगा। पिछले दस सालों से कौशांबी में विपुल मात्रा में केले की पैदावार हो रही है, इससे यहां के किसान भी केले से खूब मालामाल हो रहे हैं और अपना खजाना भर रहे हैं। भूसावल से केले का आना पहले ही बंद हो चुका है। कौशांबी का केला मध्य प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के एनसीआर व उसके सीमा से सटे हरियाणा राज्य में भेजा जाता है।

कौशांबी में एक हजार हेक्टेयर में केले की खेती की जाती है। कौशांबी केले को लेकर फिर विश्व बाजार में चर्चा में आ गया। इस केले की मांग अब भारत के राज्यों में ही नही बल्कि जापान, जर्मनी और इंडोनेशिया भी लाभांवित होंगे। यहां केले की खेती करने वाले किसान पुरस्कार के हकदार हैं जिन्होने अपने केले की खेती को सफलतम बनाकर न केवल उत्तर प्रदेश की कौशांबी को बल्कि भारत के नाम में चार चांद लगाया है।

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