लेखक परिचय

डॉ. मनोज चतुर्वेदी

डॉ. मनोज चतुर्वेदी

'स्‍वतंत्रता संग्राम और संघ' विषय पर डी.लिट्. कर रहे लेखक पत्रकार, फिल्म समीक्षक, समाजसेवी तथा हिन्दुस्थान समाचार में कार्यकारी फीचर संपादक हैं।

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डॉ. मनोज चतुर्वेदी

कॉलेज लाइफ पर बनने वाली फिल्मों में ‘स्टाइल’, ‘मुहब्बतें’, ‘हासिल’, ‘इश्क-विश्क’ और ‘थ्री इडियट्स’ जिसमें किस प्रकार युवा पीढ़ी सामंती मूल्यों से ग्रसित होकर छात्र राजनीति करती हैं तथा सहशिक्षा का किस प्रकार युवकों-युवतियाें पर प्रभाव पड़ता है। युवक-युवतियां कॅरियर को छोड़कर सेक्स, शराब, मस्ती तथा राजनीति (हुड़दंगी) करने लगते हैं। ऐसी स्थिति आती है जब ‘ माया मिली न राम’ की उक्ति हम चरितार्थ होते हुए देखते है। ठीक इसी प्रकार के विषयों को केंद्रित करते हुए ‘इसी लाइफ में’ फिल्म आयी है। निर्देशक विधि कासलीवाल की यह पहली फिल्म है।

राजनंदिनी (संदीपा धर) एक छोटे शहर की लड़की है जो महानगरीय जीवन में जाकर अपना कॅरियर संवारना चाहती है पर इसमें रोड़ा बनते है उसके परंपरावादी पिता(मोहनीश बहल) जो घोर परंपरावादी है। जिसके मन में वही भारतीय प्रथा, परंपरा और रूढ़ियां है। हरियाणा के खाप पंचायतों को देखा जा सकता है जो जीते हैं 20 वीं शताब्दी में पर विचार रखते है कि ईसा पूर्व के। वे बच्चों को एम बी ए, एम सी ए तथा अन्य प्रोफेशनल कोर्स कराकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी करने का स्वप्न देखते हैं पर उनके युवक-युवतियां अपने मनोनुकूल जीवनसाथी नहीं चुन सकते। जीवन साथी का चुनाव वे अपने अनुसार करेंगे। हां, लेकिन पत्नी के अनुनय-विनय पर पढ़ने हेतु भेज देते हैं। इसी बीच विवान आर्या (अक्षय ओबेराय) तथा दोस्तों के साथ राजनंदिनी (संदीपा धर) की मित्रता हो जाती है। इसी बीच राजनंदिनी को घर पर बुलाकर शादी करने का प्लान होता है। लेकिन फिर विजय होती है प्रेम की। राजनंदिनी और विवान आर्या परिणय सूत्र में बंध जाते हैं।

कुल मिलाकर फिल्म को ठीक-ठाक कहा जा सकता है। फिल्म-निर्माता व निर्देशकों के पास पिटे-पिटाए कहानियों के शिवा और कुछ तो है नहीं। कुल मिलाकर यह फिल्म उन युवाओं को प्रेरित करेगी जो देहातों से महानगरीय जीवन की शुरूआत कर रहे हैं। ये युवक-युवतियां एडजस्टमेंट कर भी जाते हैं तथा नहीं भी कर पाते हैं।

कलाकार : अक्षय, संदीपा धर, मोहनीश बहल वगैरह। कथा व निर्देशन : विधि कासलीवाल। निर्माता : कमल कुमार बड़जात्या, राजकुमार बड़जात्या और अजीत कुमार बड़जात्या। सह निर्माता : सूरज बड़जात्या और रजत बड़जात्या। पटकथा व संवाद : सुलेखा वाजपेयी करकरे। संगीत : मीत ब्रोस अंजन। गीत : मनोज ‘मुंतशीर’।

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