लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-विमलेश बंसल ‘आर्या’- poetry
1. ईश्वर दास के लाला लाल,
था नाम महात्मा वेद पाल।
जनवरी दस को जन्म लिया था,
ईश्वर का गुणगान किया था।
प्रभु शरणाश्रित बन किया कमाल॥
शत्-शत् नमन हे ईश्वर लाल

2. हंसमुख थे बहु भोले-भाले,
गोरे रंग के थे, दिलवाले।
नम्र-शील जिनका स्वभाव,
तेजस्वी मुख पर प्रभाव।
मस्त-व्यस्त हृदय विशाल॥
शत्-शत्…

3. वेदों के वह सच्चे राही,
दयानंद के बने सिपाही।
वेद पाठ हमको सिखलाया,
आध्यात्मिक बहु ज्ञान बताया।
अमृत के बन मधुर प्याल॥
शत्-शत्…

4. सच्चे सेवक ईश्वर के बन,
गुरू सेवक के भी सेवक बन।
लगा दिया अपना तन-मन-धन,
किया समर्पित पूरा जीवन।
लेकर मुख स्वर कर में ताल॥
शत्-शत्…

5. भाषा-शैली की चतुराई,
लिखी पुस्तकें सरल व ग्राही।
करके चतुर्वेद अनुवाद,
‘प्रणव उपासना’ गुँजाई नाद।
वक्ता, गायक बेमिसाल॥
शत्-शत्…

6. सरल सादगी सात्विकता ले,
ईश्वर में सद् आस्तिकता से।
बहत्तर पूरे कर गए साल,
काट गए जीवन जंजाल।
याद बहुत आते हर साल॥
शत्-शत्…

7. पूज्य प्रवर फ़िर से आजाओ,
आचार्य बन फ़िर से सिखलाओ।
भूल गए सारी शिक्षाएँ,
याद रहीं अपनी कक्षाएँ।
‘पर’ का कभी न आया ख्याल॥
शत्-शत्…

8. सभी आर्य जन व नर-नारी,
श्रद्धांजलि देते हैं भारी।
‘विमल’ आपकी रहे आभारी,
खिली रहे आर्यों की क्यारी।
आशीषों से भर दो थाल॥
शत्-शत्…

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