लेखक परिचय

केशव पटेल

केशव पटेल

लेखक चंदा बारगल हिंदी दैनिक प्रदेश टुडे के कार्यकारी संपादक हैं.

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पाकिस्तानी मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान और उसके परिवार की हत्या के रहस्य पर से आखिर कब पर्दा उठेगा, कोई नहीं जानता, पर उसकी हत्या का रहस्य एक सामान्य अपराध का विषय न होकर गंभीर और चिंताजनक है। क्योंकि लैला खान पाकिस्तानी नागरिक थी। उसके जेहादियों से संबंध के बारे में भी शंका थी और इतने महीनों से उसके लापता होने पर भी पुलिस ने उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया था।

लैला खान के मामले में ये 3 मुद्दे गंभीर हैं, इसलिए लैला खान के लापता होने के बाद उसकी हत्या उतना सामान्य मामला नहीं है, जितना दिखाई देता है, उसके शक की सुई कहां जाकर थमेगी, इसका अंदाज लगाना भी मुश्किल है। कुछ माह पूर्व उसके लापता होने की खबरें मीडिया में आना शुरू हो गई थीं। फिर वह बाघा बॉर्डर पाकिस्तान चली गई, यहां से वह किसी अरब देश में चली गई। यहां तक अफवाहों ने सिर उठा लिया था।

इसी दौरान यह भी पता चला कि वह मुंबई से 111 किमी दूर स्थित नासिक जिले के इगतपुरी के पहाड़ी और जंगली इलाके के फॉर्महाउस पर रह रही थी, वहीं से उसके गायब होने की बात कही जाती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इतना सब होने के बावजूद मुंबई पुलिस ने उसे खोजने की दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए, क्योंकि लैला के गायब होने के बाद उसकी मां सेलिना के पहले पति नादिर पटेल ने सबसे पहले पिछले साल मुंबई के ओशिवरा पुलिस थाने में इस बाबत शिकायत दर्ज कराई थी। यदि लैला गायब हो गई थी और उस बाबत शिकायत भी हुई थी, तो उसका पता क्यों नहीं लगाया गया। एक साल तक पुलिस चुप क्यों बैठी, यह हत्या से भी बड़ा रहस्य है।

ठेस पहुंचाने वाली एक बात यह भी है कि कुछ माह पूर्व एक चैनल के पत्रकार ने कैमरा लेकर इगतपुरी के इस फॉर्महाउस का कवरेज किया था। तब वह बंगला उजाड़-वीरान पड़ा था। वहां का दौराकर उसने फॉर्महाउस का ‘राज’ दिया था। लैला के वहां ठहरने के दौरान काम पर जाने वाले एक व्यक्ति का इंटरव्यू भी इस पत्रकार ने दिखाया था, पर इतना होने पर भी पुलिस को इस मामले में लैला का पता लगाने की बुद्धि क्यों नहीं आई, यह चमत्कारिक बात नहीं क्या।

लैला खान केवल अभिनेत्री ही नहीं थी, वह पाकिस्तानी नागरिक थी। केवल एक सिनेमा के जरिए भारत आई पाकिस्तानी अभिनेत्री का इस तरह गायब हो जाना, यह सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर बात नहीं है क्या। अब साल भर के बाद उसी बंगले के परिसर में खुदाई करके पुलिस ने 6 लोगों के नरकंकाल बरामद किए हैं। लैला खान, जिंदा नहीं है, यह बात कभी से उजागर हो गई थी, क्योंकि परवेज टाक नामक इस बदमाश ने ही यह कबूल किया था।

जम्मू पुलिस के शिकंजे में यदि परवेज नहीं फंसा होता, तो आज भी लैला खान की हत्या गुलदस्तों में दफन होकर रह जाती। जम्मू पुलिस को एक आतंकी मामले की जांच के दौरान एक संदिग्ध गाड़ी हाथ लगी थी। लश्कर-ए-तोयबा की विध्वंसक गतिविधियों के लिए विस्फोटक लाने-ले-जाने में इस्तेमाल की जाने वाली यह गाड़ी जम्मू पुलिस के हाथ लगने के बाद पुलिस ने उसके मालिक का पता लगाया, तो उसे चौंकाने वाली जानकारी मिली और उससे ही इस मामले की गुत्थी सुलझी। वह गाड़ी लैला खान के नाम पर रजिस्टर्ड थी।

परवेज ही उस गाड़ी को मुंबई से जम्मू तक ले गया था। उसके ‘लश्कर-ए-तोयबा’ से संबंध थे। फिर उसने उस गाड़ी का इस्तेमाल जेहादी गतिविधियों के लिए किया। जम्मू पुलिस ने जब उसे खादी वर्दी का खौफ दिखाया, तब जाकर वह टूट गया और उसने लैला खान और उसके परिवार की हत्या करना कबूल किया। इसके बाद ही मुंबई पुलिस ने हाथ-पैर हिलाना शुरू किए। पहले परवेज को मुंबई लाया गया, फिर उसके बयान लिए गए।

तब उसने मुंबई पुलिस के समक्ष लैला सहित उसके पूरे परिवार की हत्या करना कबूल किया। इसके बाद ही मुंबई पुलिस हरकत में आई और उसने इगतपुरी के फॉर्महाउस पर नजरें दौड़ाई। साल भर तक वहां कोई भी नहीं फटका, और परवेज की निशानदेही पर मुंबई पुलिस जब वहां गई तो उसे तीन स्थानों पर खुदाई करने पर 6 कंकाल हाथ लगे। इसके अलावा हत्या में प्रयुक्त लोहे की रॉड, चाकू, जेवर, कपड़े आदि बरामद हुए। फोरेंसिक जांच पूरी होने पर और भी बातें पुष्ट हो जाएंगी।

लैला खान के मामले में जो गंभीर सवाल है, वह है मुंबई पुलिस की अकर्मण्यता का और लापरवाही का। लैला, पाकिस्तानी अभिनेत्री थी, उसका अचानक इस तरह गायब हो जाना और उसे मौत के घाट उतारने वाले का लश्कर-ए-तोयबा से संबंध होना, यह वाकई गंभीर बात है। परवेज टाक का लश्कर-ए-तोयबा से संबंध था और वह लैला खान की मां सेलिना का तीसरा पति था। फिर लैला का बॉलीवुड की फिल्मों में अभिनय करने आना संदेहास्पद नहीं था क्या। अपने पति को छोड़कर आई लैला की मां और दो लोगों से बहुत कम समय में निकाह करती है और उनसे भी अटपटा बर्ताव करती है, यह जितना गूढ़ है, उतना ही उस परिवार का इगतपुरी के उस निर्जन भाग में बंगला खोजकर रहना भी शंकास्पद है।

जितने समय लैला और उसका परिवार इगतपुरी के उस बंगले में रहा, तब वहां उनसे मिलने आने-जाने वालों के बारे में या वहां होने वाले गोरखधंधों के बारे में पुलिस को कुछ भी नहीं पता। लैला को मुंबई में या भारत में अभिनय करने के लिए लश्कर-ए-तोयबा ने ही तो कहीं प्लांट नहीं किया था। लैला का इस्तेमाल कहीं जेहादी कार्रवाईयों में तो नहीं किया गया! ऐसे अनेक सवाल हैं और अनेक शंका-कुशंकाएं हैं पर उनका जवाब हमें कभी मिलने वाला नहीं है, क्योंकि हमारी सरकार की न तो इसमें रुचि है और न ही पुलिस की इच्छा-शक्ति। अब सारी भागदौड़ चालू है, पर उसके पीछे आतंकी हमलों के धागे-डोरे ढूंढने की इच्छा किसी को भी दिखाई नहीं देती।

जैसे किसी प्रेम-प्रसंग में हुए हत्याकांड की छानबीन हो रही हो, सिर्फ इतना ही दिखाई पड़ता है। एक पाकिस्तानी अभिनेत्री भारत आती है, शान से एक निर्जन स्थान पर रहती है और एक दिन वह गायब हो जाती है। गायब हुए भी साल बीत जाता है, तब कहीं उसके बंगले के परिसर से ही उसका कंकाल मिलता है। इतने समय तक पुलिस को यह क्यों नहीं सूझा कि उसे खोजा जाए, छानबीन की जाए, यही सबसे बड़ा चिंता का विषय है। पुलिस को लैला के ओशिवरा फ्लैट से 1 हजार से अधिक तस्वीरें मिलीं हैं। बताते हैं कि इन तस्वीरों में कतिपय पुलिस अधिकारियों से लेकर कुछ बड़ी हस्तियां भी शामिल हैं। क्या इसीलिए पुलिस लैला खान की हत्या के मामले में तह तक नहीं जाना चाहती।

बताया जाता है कि लैला और उसके पूरे परिवार की हत्या उसके सौतेले बाप परवेज टाक ने लैला के चौकीदार शाकिर हुसैन के साथ मिलकर की। इस हत्या के पीछे अभी तक जो वजह सामने निकलकरआई है, वह है लैला की मां सेलिना की जायदाद। बताया जाता है कि लैला का परिवार बहुत ही जल्द दुबई सेलिट होने वाला था और इसके लिए लैला की मां सेलिना ने पूरी तैयारी भी कर ली थी।

सेलिना ने भारत में मौजूद अपनी संपत्ति की पावर ऑफ अटार्नी अपने दूसरे पति आसिफ शेख के नाम की थी। ये बात परवेज टाक को नागवार गुजरी थी और शायद यही वजह बन गई पूरे परिवार की हत्या का कारण। एक ही परिवार के इतने-इतने लोग मौत के घाट उतार दिए जाते हैं और पुलिस विभाग को इसकी कानों-कान खबर तक नहीं होती है। इस घटना से खुलती है हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था की पोल।

अगर लैला की गाड़ी कश्मीर पुलिस के हाथों नहीं लगती, तो शायद इस हत्याकांड के राज हमेशा के लिए दफन हो जाते। बताया जाता है कि लैला के तार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोयबा से जुड़े थे, फिर भी हमारी सुरक्षा एंजेंसियों को इस बात की कानों-कान खबर तक नहीं लगी। हो सकता है लैला का भारत में डेरा जमाने के पीछे किसी तरह की आतंकी घटना की आमद दर्ज करना हो। मगर हमारी सुरक्षा एंजेंसियां तो जैसे कुंभकर्णी नींद सोई हुई थीं। देश में आए दिन आतंकी घटनाएं हो रही हैं, ऐसे में इस तरह के संदिग्ध मामले में कैसे सुरक्षा एजेंसियां चूक गईं, यह एक गंभीर सवाल है। धन्य है हम और धन्य है हमारी सुरक्षा प्रणाली।

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