लेखक परिचय

श्रीराम तिवारी

श्रीराम तिवारी

लेखक जनवादी साहित्यकार, ट्रेड यूनियन संगठक एवं वामपंथी कार्यकर्ता हैं। पता: १४- डी /एस-४, स्कीम -७८, {अरण्य} विजयनगर, इंदौर, एम. पी.

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श्रीराम तिवारी

अति-उन्नत वैज्ञानिक-सूचना एवं संचार क्रांति की बदौलत धरती पर यह बहुत तीव्रगामी परिवर्तनों की लालसा का दौर है. अपने बाह्यरूप -आकार में चीजें जितनी विद्रूप नजर आती हैं ; वस्तुतः वे अपने आप में अन्यान्य सुन्दर और सकारात्मक गुणों से सम्पृक्त भी हैं.वैश्विक परिदृश्य में भारत की तस्वीर यदि यूरोप, पूर्व-एशिया चीन, तथा समीचीन राष्ट्रों के सामने फीकी है तो उपद्रवग्रस्त,आतंकग्रस्त मुस्लिम राष्ट्रों और घोर दरिद्रता एवं भुखमरी से पीड़ित मध्य-अफ़्रीकी राष्ट्रों से उजली भी है. संचार माध्यमों पर शक्तिशाली वर्ग के आधिपत्य और भूमंडलीकरण की कोशिशों ने दुनिया भर के निर्धन,अकिंचन और अभावग्रस्त नर-नारियों को लगभग पंगु ही बना डाला है. शोषण से मुक्ति की कामना की जगह अवसाद,कुंठा,हिंस्र प्रतिस्पर्धा और संवेदनहीनता स्थापित होती जा रही है.

भारत के विद्वान् लेखक, इंटेलेक्चुअल, एनजीओ संचालक, अखवार नवीस और इन सबके प्रभामंडल से आक्रांत भारत का मजदूर-छोटी जोत का किसान-खुदरा व्यवसायी-खेतिहर मजदूर-दैनिक वेतनभोगी और निम्न मध्यम वर्ग का शिक्षित-अशिक्षित आवाल वृद्ध-नर-नारी वेहद उदिग्नता के दौर से गुज़र रहा है. नितांत सर्वहारा-वर्ग को जो कि वर्गीय-चेतना से कोसों दूर है,इस जड़तामूलक अधोगति से कोई सरोकार नहीं . अपनी दयनीयता,निर्धनता,आवास-हीनता,सामाजिक-आर्थिक-शारीरिक सुरक्षा-विहीनता का कारण देव {इश्वर}को मानकर चलने वालों को वर्तमान दौर के इन झंझावातों में भी आशा कि जो एक किरण नज़र आ रही है ;वो है अपने मताधिकार की ताकत. वोट की ताकत का लोकतंत्र में उतना ही महत्व है जितना कि सूरज में धूप का और चंदा में चांदनी का. वैयक्तिक, पारिवारिक, सामाजिक, जातीय, क्षेत्रीय जैसे निक्रष्ट स्वार्थों से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्वार्थ भी वोट की ताकत से ही साधे जा सकते हैं. वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य को भारत का सूचना एवं संचारतंत्र कुछ इस तरह पेश कर रहा है की मानों गठबंधन के एनडीए और यूपीए दो ध्रुव ही क्षितिज पर विद्यमान हैं;तीसरा कोई विकल्प मौजूद ही नहीं है.

माना कि अधिकांश क्षेत्रीय दलों में राष्ट्रीय मूल्यों और अंतर्राष्ट्रीय नीतियों का अभाव है ,किन्तु उनको संगठित और संयोजित करने वाले वामपंथ तथा यत्र-तत्र बिखरे हुए पुराने लोहियावादियों-समाजवादियों के पास

किसी किस्म की आर्थिक,सामाजिक,वैदिशिक और राजनेतिक चिन्तनशीलता का अभाव नहीं है नितीश बाबु, मायावती, जयललिता, नवीन पटनायक, देवेगौडा, मुलायम,पंवार, पासवान बादल , उमर अब्दुल्ला और समूचा वाममोर्चा यदि एक हो जाएँ और भाजपा का बाहर से समर्थन मिले तो तीसरा मोर्चा सता में आ सकता है..कांग्रेस और यु पी ऐ यदि राहुल गाँधी को आगामी प्रधानमंत्री मानकर चल रहे हैं तो यह तभी संभव है जब राहुलजी उन नीतियों से नाता तोड़ें जिनके कारण आज़ादी के ६४ साल बाद भी उन्हें स्वयम गाँव के दलित गरीब कि झोपडी में एक ग्लास स्वच्छ पानी नहीं मिल सका. देश कि जनता यदि यूपीए गठबंधन को तीसरी बार बहुमत से जिताती है और यूपीए संसदीय बोर्ड अपना आगामी नेत्रत्व राहुल को सौंपता है तो इससे यह माना जाएगा कि गाँव में २६ रुपया रोज कमाने वाला और शहर में ३२ रुपया रोज कमाने वाला खुशहाल है. मानाकि राहुलजी नेकदिल इंसान हैं,हर दिल अज़ीज़ हैं,वतन परस्त हैं,भ्रष्टाचार और अन्याय के विरुद्ध हैं ,युवा हैं,सुन्दर हैं किन्तु क्या वे विश्व-बैंक ,अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष और देश पर काबिज कार्पोरेट लाबी द्वारा प्रणीत प्रतिगामी आर्थिक नीतियों को पलटकर जन-कल्याणकारी,सामाजिक सरोकारों से युक्त वैकल्पिक नीतियों के बारे में रंचमात्र भी चल सकेंगे? नहीं !!

१९६९ में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिराजी ने नारा दिया था- गरीवी हटाओ- आज़ाद भारत कि सत्ता के ६५ सालों में से लगभग ५५ साल केवल और केवल कांग्रेस ने ही देश पर हुकूमत की है.गरीवी ज्यों की त्यों बरकरार है,महंगाई सुरसा के मुख की तरह बिकराल है,भ्रष्टाचार अपरम्पार है, हर तरफ सरकारी अफसरों द्वारा देश कि जनता की लूट वेशुमार है. सब जानते हैं कि कौन जिम्मेदार है?

स्वर्गीय राजीव गाँधी ने प्रचंड बहुमत पाने के बाद,सत्ता में आने पर १९८५ में कहा था कि ’हम १०० पैसे दिल्ली से भेजते हैं किन्तु ८५ बीच में गायब हो जाते हैं’कांग्रेस के लिए यह सूक्त-वाक्य अपने अधिकृत लेटर पैड पर छपवा लेना चाहिए.अन्ना एंड कम्पनी,बाबा रामदेव या कोई और अधिनायकवादी व्यक्ति या समूह देश में दिग्भ्रम फ़ैलाता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बहरहाल कांग्रेसी नेत्रत्व की ही मानी जाएगी.

देश कि प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा बड़े गर्व से दावा करती है कि वह अन्य दलों से अलग है.उसका चाल,चेहरा और चरित्र बहुत उन्नत किस्म का है.केंद्र की सत्ता में आने पर उसने देश को जो घाव दिए वो तो सदियों तक याद रखे जायेंगे किन्तु जो वादे किये उनके पूरे न होने से समूचा हिन्दू समाज उससे कट चूका है.अब भाजपा में यत्र तत्र सर्वत्र विकास -पुरुष {विकास नारी नहीं!}पैदा किये जा रहे हैं.नरेंद्र मोदी को जब गडकरी ने विकास- पुरुष कहा तो आडवानी जी ने कहा शिवराज ही विकास पुरुष है,उधर रमण सिंह भी सरकारी इश्तहारों में विकास पुरुष कि छटाएं बिखेर रहे हैं.स्वयं गडकरी जी कि भी सेहत अच्छी खासी है ,उनका विकास भी वैयक्तिक रूप से श्लान्घ्नीय है,कि संघ ने फर्श से अर्श पर बिठा दिया.भाजपा में रेड्डी बंधुओं ने जितना विकास किया उसका शतांश भी कोई कांग्रेसी क्या खाक करेगा?

तत्कालीन अटल सरकार के चार मंत्रियों पर हवाला काण्ड कि तलवार लटकी थी.२००० में तत्कालीन केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त एन विट्ठल ने सीबीआई से कहा था कि वह उन चार केन्द्रीय मंत्रियों कि अंधाधुंध काली- कमाई की जांच करे, जिन पर हवाला के आरोप हैं.उसके बाद क्या हुआ ?एनडीए सरकार ने विट्ठल की नाक दबा दी, उनके अधिकार छीनकर सतर्कता-आयोग को तीन सदस्यीय बना दिया.ताकि आइन्दा कोई एन बित्थल इस तरह की हिमाकत न कर सके.यह काम उस भाजपा ने किया जो कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के लिए रथ-यात्रायें निकाल रही है.कभी अन्ना ,कभी रामदेव कभी उपवास और कभी रामधुन गाकर सत्ता-सुन्दरी का आह्वान कर रही है.ये इश्क नहीं आसान …

भाजपा आज भी क्वात्रोची-क्वात्रोची चिल्ला रही है जबकि अपने किये धरे को भूल रही है.सारा देश जानता है कि वह भाजपा का ही एक चेहरा था जो शराब के नशे में बोल रहा था,पैसा खुदा नहीं,पर खुदा कसम ,खुदा से कम भी नहीं’यह बिडम्बना ही है कि भाजपा अपनी कसौटी पर-चाल,चेहरा,चरित्र पर ढेर हो गई जिसका फायदा अनायास ही उस कांग्रेस को २००४ में मिला जो देश को दुर्गति में ले जाने के लिए जिम्मेदार है.भाजपा अब जनता कि नहीं दौलत वालों की ,राजनीति के ठेकेदारों की और बड़बोलों की अंक-शायनी बन चुकी है ,अन्ना,रामदेव या नत्थू-खेरों के चक्कर में दिग्गजों के अहंकार का अड्डा बन चुकी है.

सिर्फ उपवास ,अनशन, रथ-यात्राओं या जन्म दिन मनाने से राज्य-सत्ता की प्रप्ति,अभीष्ट का ध्येय समभाव नहीं. राज्य-क्रांति के लिए यदि जन-समर्थन या वोट चाहिए तो जनता के हित की नीतियां और कार्यक्रम पेश करो वरना हाथ कुछ नहीं आने वाला- वही-जीरो/सन्नाटा.

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2 Comments on "नये राजनैतिक ध्रुवीकरण की संभावनाएँ पुनर्जीवित"

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श्रीराम तिवारी
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very good comments from shri jasveersingh ji,Now a days it’s very auspicious massage for those who are fighting for justice,piece and corruption.thanks for watching a right path.

SARKARI VYAPAR BHRASHTACHAR
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SARKARI VYAPAR BHRASHTACHAR
|| ॐ साईं ॐ || सबका मालिक एक काले धन पर बेफिक्री-अंधा पिसे और कुत्ते खाय …..भ्रष्टाचारियो को कौन समझे *********************************************** एक विस्फोटक खुलादे में स्विस बैंकिंग घोटालों को उजागर करने वाले रुडोल्फ एल्मर ने कहा कि बहुत सी भारतीय कंपनियां और धनी भारतीय, जिनमें अनेक फिल्म स्टार और क्रिकेटर भी शामिल हैं, केमैन द्वीप जैसे टैक्स हैवेन इलाकों में अपने काले धन को जमा कर रहे थे। एल्मर ने कहा कि 2008 में उन्होंने जो सूची जारी की थी उसमें कर चोरी करने वाले अनेक भारतीयों के नाम भी दर्ज थे। उन्होंने भारत सरकार पर आरोप लगाया कि वह… Read more »
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