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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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-राजेश कुमार

हम अक्सर उस दिशा की तरफ जाने के लिए लालायित रहते है, जहां हम खुद को एक हीरो की भांति पेश कर सकें। गलैमर और शान भरी जिंदगी के लिए प्रसिद्ध पत्रकारिता क्षेत्र में इसी कारण बीते कुछ सालों में काफी छात्र-छात्राएं खिंचे चले आ रहे हैं। छात्राओं की बढ़ती भीड़ के कारण देश में पत्रकारिता के संस्थानों में धड़ल्ले से ईजाफा हो रहा है, लेकिन क्या इतने विद्यार्थियों के लिए मीडिया क्षेत्र में पर्याप्त संभावनाएं हैं? यह सच है कि देश मीडिया के क्षेत्र में दिन रात उन्निती कर रहा है और पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले एक दशक में क्रांति सी आ गई है। इसके बावजूद लोगों को यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि देश की जनसंख्या भी माशाअल्लाह दिन दुगुनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रही है। ऐसे में जाहिर है हर किसी को तो पत्रकार नहीं बनाया जा सकता।

 

खैर मैं अपने लेख में पत्रकारिता में प्रवेश करने के बाद की चुनौतियों से अवगत करवाना चाहता हूं ताकि इस क्षेत्र में आने वाले किसी से प्रभावित होकर या मात्र चकाचौंध भरी दुनिया का ख्बाब मन में संजोए हुए न आए, बल्कि पत्रकारिता में प्रवेश करने से पहले मानसिक रूप से पूरे तैयार बनें। सबसे पहले बात की किसी भी संस्थान में पत्रकारिता की पढ़ाई कर लेने मात्र से कोई पत्रकार नहीं बन जाता। इसके लिए हमें अपने भीतर अनेक गुणों को पैदा करना होगा। बल्कि यूं कहें कि यदि कोई व्यक्ति गहरी सूझबूझ रखता है और स्वयं को किसी भी चुनौती में ढालने से कतराता नहीं, वह बिना किसी डिग्री के भी पत्रकार बन सकता है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि जो भी नौजवान पत्रकारिता में कदम रखना चाह है, वह अपने मन से यह सोच मिटा दे कि पत्रकार बनने का मतलब मात्र बड़ी बड़ी शख्सियतों से बातें करना व खुद को कैमरे के सामने खड़ा करना ही नहीं है। पत्रकारिता का क्षेत्र इस सोच से भी कहीं अधिक विस्तृत है व चुनौतियों कहीं अधिक खतरनाक। एक पत्रकार को रात व दिन एक बराबर होते हैं, उसे अधूरी नींद होने के बावजूद भी हर वक्त चुस्त-दुरुस्त रहना पड़ता है।इएक छोटी सी छोटी गलती भी पत्रकारिता में आपके करियर के लिए घातक साबित हो सकती है। फिर चाहे वह गलती आपके लिखने में हो या जानकारी में। सबसे अहम बात तनाव में काम करने का गुण आपको अपने भीतर ईजाद करना ही होगा, अन्यथा आप मानसिक तौर पर बीमार पड़ जाएंगे। भाषा व शब्दों पर सही पकड़ इस क्षेत्र के लिए काफी अहम हैं। पत्रकारिता में रहते हुए अधिक छट्टियों की आशा करना व्यर्थ्थ है, आपको अपने ऑफिस में ही अपने परिवार को टटोलकर काम पर पूरा ध्यान देना होगा। यदि आप ऐसा सब कर पाने में सक्षम हैं तो निश्चित तौर पर आप बहुत बढ़िया पत्रकार बन सकते हैं और आपको मेरी तरफ से शुभकानाएं।

 

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1 Comment on "पत्रकारिता की वास्तविकता"

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लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार
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आदरणीय -राजेश कुमार जी सप्रेम साहित्याभिवादन

पत्रकारिता की वास्तविकता है आ बैल मुझे मार अर्थात पत्रकार समाज की बुराइयों को हल करने के उद्देश्य से इस ओर कदम रखता है और लेखनी से लड़ता है जिसमे हिम्मत होती वही इस ओर अपना कदम रखता है …..

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