लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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iranडॉ. वेदप्रताप वैदिक
ईरान के विरुद्ध लगे अनेक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के उठ जाने पर ऐसा लग रहा है, मानो ईरान को दूसरी आजादी मिली है। ईरान के साथ अमेरिका के इतने घनिष्ट संबंध थे कि शाहंशाह के ज़माने में ईरान को एशिया में अमेरिका का चौकीदार माना जाता था लेकिन जैसे ही ईरान में इस्लामी क्रांति की हवा बहने लगी, आयतुल्लाह खुमैनी ने अमेरिका को ‘बड़ा शैतान’ कहना शुरु कर दिया था। इस्लामी ईरान और अमेरिका के बीच ऐसी ठन गई कि उसके दूतावास को ईरानी सरकार ने ‘जासूसखाना’ कहना शुरु कर दिया। दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध भंग हो गए और पिछले कुछ वर्षों से पश्चिमी राष्ट्र ईरान पर यह आरोप लगाने लगे कि ईरान चोरी-छिपे परमाणु बम बना रहा है। वह परमाणु-अप्रसार संधि को भंग कर रहा है। इसी आधार पर ईरान के विरुद्ध तरह-तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए थे। इन प्रतिबंधों ने ईरान की हालात खस्ता कर दी थी।
अब वियना की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि ईरान ने अपने परमाणु बम अभियान को त्याग दिया है। उसने अपने 14000 सेंट्रीफ्यूजों को एजेंसी के हवाले कर दिया है। उसने अपने संशोधित यूरेनियम के भंडार की 98 प्रतिशत सामग्री का निर्यात कर दिया है। उसने अराक स्थित अपने भारी पानी की भट्ठियां को सीमेंट से मढ़ दिया है। अब परमाणु बम बनाने का कोई खतरा नहीं है। अब प्रतिबंध हट जाने से ईरान के 30 बिलियन डाॅलर के जब्तशुदा माल की वापसी होगी। अमेरिका भी ईरान की जब्त राशि ब्याज समेत वापस करेगा। अब ईरान का अंतरराष्ट्रीय व्यापार फिर जोरों से शुरु हो जाएगा। भारत को भी बड़ी सुविधा हो जाएगी। ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने कहा है कि ईरान के इतिहास का यह स्वर्णिम दिन है। उन्होंने कहा है कि ईरान सभी देशों के साथ मैत्री और शांति चाहता है।
लेकिन अब भी सउदी अरब और इस्राइल जैसे देश ईरान को खतरा बता रहे हैं और कह रहे हैं कि वह चोरी-छिपे परमाणु बम जरुर बनाएगा। अमेरिका के भी कुछ रिपब्लिकन नेता ईरान पर अब भी शक कर रहे हैं। लेकिन बराक ओबामा गद्—गद् हैं। अब अमेरिका के पास पश्चिम एशिया में सउदी अरब का एक विकल्प खड़ा हो गया है। ईरान के जरिए वह मुस्लिम जगत के करोड़ों शिया लोगों को तो प्रभावित करेगा ही, वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के आतंकियों को भी काबू करने में ईरान की मदद लेगा। अमेरिका के साथ ईरान के संबंध अच्छे होने का लाभ भारत को तो मिलेगा ही मिलेगा।

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